किसी नेशनल
पार्क में
बाघ देखने
जाइए तो
अपने गाइड
की बातों
पर गौर
कीजिएगा। ‘आज
सुबह ही
यहां बाघ दिखा था’,
‘इसी जगह
रोज़ पानी
पीने आता
है’, ‘यह
देखिए बाघ
के पंजों
के निशान’,
‘इसी झाड़ी
के पीछे
छुपा है’
जैसी बातों
से ये
गाइड पर्यटकों
को आश्वस्त
करते रहते
हैं कि
बाघ अभी
दिखेगा, अभी
दिखेगा और
दर्शक पहले
उत्साह में
और फिर
मायूसी में
जंगल घूम-घाम कर
लौट आता
है। यह
फिल्म भी
कुछ ऐसी
ही है
जिसमें बाघ
के शिकार
पर गए
एक शख्स
और उसे
शिकार पर
ले जाने
वाले कुछ
लोगों की
कहानी है।
