-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इलाहाबाद के लौंडे को यह शहर छोटा लगता है, अपने पिता की ईमानदारी और वफादारी ओछी लगती है। उसे तो मुंबई जाना है,
ऊंचा उड़ना है। अपने भगवान शकुन कोठारी की तरह पैसे कमाने हैं। मुंबई पहुंचने के छह ही महीने में वह शकुन का खास आदमी बन भी जाता है। लेकिन उसकी अंतरात्मा उसे शकुन की तरह गलत रास्ते पर चलने से रोक लेती है और वह अपने इस गुरु को ही सबक सिखाने में जुट जाता है।