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Sunday, 2 August 2020

यात्रा-सुकून से हुई भवन तक की यात्रा (भाग-3)

-दीपक दुआ...
दर्शनी दरवाजा
दोपहर करीब सवा बारह बजे हम लोग अपने होटल से वैष्णो देवी की चढ़ाई के लिए निकल पड़े। सड़क पर आते ही ऑटो-रिक्शा वाले ‘बाण गंगा दस रुपए सवारी’ कह कर पीछे पड़ गए लेकिन मैं हमेशा ही जाते समय तो पैदल ही गया हूं। (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) तो, गोलगप्पे खाते और बाईं तरफ नीचे के सुंदर दृश्य देखते हुए करीब 15 मिनट में हम लोग वहां पहुंच गए जहां से वैष्णों देवी की यात्रा की औपचारिक चढ़ाई शुरू होती है और जिस जगह का नाम है-दर्शनी दरवाजा। पर अभी तो सिर्फ शुरूआत हुई थी, सफर तो अभी बाकी था।