-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
एक युवक को रोड-एक्सीडैंट के बाद अस्पताल लाया जाता है। डॉक्टर पाते हैं कि उसके सीने पर ऑपरेशन के ज़रिए एक बम कुछ इस तरह से फिट है कि उसकी धड़कन रुकी तो बम फटा। युवक को याद नहीं वह कौन है-आतंकवादी या कोई और। पुलिस उसे मारना चाहती है। तभी पता चलता है कि इस बम से 24 बमों को सिग्नल जा रहे हैं। यह फटा तो वे भी फटे। पुलिस जुटी है सारे खेल का खात्मा करने में। अंत में एक ट्विस्ट आता है और...!
एक युवक को रोड-एक्सीडैंट के बाद अस्पताल लाया जाता है। डॉक्टर पाते हैं कि उसके सीने पर ऑपरेशन के ज़रिए एक बम कुछ इस तरह से फिट है कि उसकी धड़कन रुकी तो बम फटा। युवक को याद नहीं वह कौन है-आतंकवादी या कोई और। पुलिस उसे मारना चाहती है। तभी पता चलता है कि इस बम से 24 बमों को सिग्नल जा रहे हैं। यह फटा तो वे भी फटे। पुलिस जुटी है सारे खेल का खात्मा करने में। अंत में एक ट्विस्ट आता है और...!