Showing posts with label motu patlu. Show all posts
Showing posts with label motu patlu. Show all posts

Friday, 14 October 2016

रिव्यू-‘मोटू पतलू’ में है ‘राउडी राठौड़’ की कहानी

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
असली हीरो को विलेन ने मार गिराया तो उसके दोस्त उसके हमशक्ल को हीरो बना कर ले आए जिसने विलेन को जम कर मजा चखाया।

कहिए, याद गई राउडी राठौड़और ऐसी ही कई और कहानियां? इस हफ्ते रिलीज हुई 3-डी एनिमेशन फिल्म मोटू पतलू-किंग ऑफ किंग्समें कुछ ऐसी ही कहानी है। फुरफुरी नगर के दमदार मोटू और दिमागदार पतलू के साथ उनके साथी डॉ. झटका और घसीटा राम जैसे किरदार हममें से कितनों के ही बचपन का हिस्सा रहे हैं। इस फिल्म में ये सर्कस से भागे एक शाकाहारी शेर को जंगल पहुंचाते-पहुंचाते ऐसे लोगों से भिड़ जाते हैं जो जंगल को तबाह करना चाहते हैं।

अपने यहां बच्चों को ध्यान में रख कर बनाई जाने वाली इस तरह की एनिमेशन फिल्मों में आमतौर पर मनोरंजन और मैसेज के बीच घालमेल हो जाता है। लेकिन इस फिल्म में इन दोनों तत्वों के बीच काफी अच्छा संतुलन बनाते हुए मनोरंजन को प्रमुखता दी गई है। हंसाते-गुदगुदाते हुए यह फिल्म आपको काफी सारी अच्छी बातें सिखा जाती है। निर्देशक सुहास कदव ने अच्छी कल्पनाशीलता दिखाई है। केतन मेहता की कंपनी माया डिजिटल स्टूडियो ने उम्दा क्वालिटी का एनिमेशन तैयार किया है।

बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी पसंद आने का दम है इस फिल्म में।
अपनी रेटिंग-साढ़े तीन स्टार
दीपक दुआ फिल्म समीक्षक पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज़ से घुमक्कड़। अपने ब्लॉग सिनेयात्रा डॉट कॉम (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक रेडियो टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)

Monday, 10 October 2016

बड़े पर्दे पर धमाल मचाएंगे मोटू-पतलू



-दीपक दुआ

कॉमिक्स के पन्नों से निकल कर फिल्मों के बड़े पर्दे पर आने वाले किरदारों को आपने हमेशा ही पसंद किया है। फिर चाहे वह सुपरमैन हो या स्पाइडर मैन, हल्क हो या मोगली, ये कैरेक्टर जब भी किसी फिल्म में आए तो इन्हें सराहा ही गया। और अब अपने देसी कार्टून मोटू-पतलू बहुत जल्द एक फिल्म में दिखाई देंगे जिसका नाम है मोटू पतलू और किंग ऑफ किंग्स
 
बता दें कि मोटू-पतलू दरअसल लोटपोटनाम की एक कॉमिक्स के किरदार हैं जिसका प्रकाशन 1969 में दिल्ली से शुरू हुआ था। इस कॉमिक्स में मोटू और पतलू को आमतौर पर बेवकूफ दिखाया जाता रहा है जिनकी ऊल-जलूल हरकतों पर हंसी आती है। लेकिन अपनी इन्हीं हरकतों के साथ-साथ मोटू-पतलू अक्सर ऐसे-ऐसे कारनामें कर बैठते हैं कि लोग तालियां बजा उठते हैं। इस काम में मास्टर घसीटा राम, डॉ. झटका, चेला राम, ढेला राम और अंगूठानंद जैसे दूसरे किरदार भी इनका साथ निभाते आए हैं।

इन किरदारों को लेकर कुछ साल पहले एक टी.वी. शो भी बना था और अब केतन मेहता जैसे दिग्गज फिल्मकार की कंपनी माया डिजिटल स्टूडियो ने इन्हें लेकर यह एनिमेशन फिल्म ही बना डाली है जो 14 अक्टूबर को रिलीज हो रही है। सुहास डी. कदव निर्देशित इस फिल्म में मोटू-पतलू फुरफुरी नगरिया में रहते हैं। सर्कस से भाग निकले एक शेर को पकड़ने का जिम्मा इन्हें मिला है लेकिन पकड़े जाने पर वह शेर कहता है कि उसे वापस सर्कस की बजाय जंगल में छोड़ दिया जाए। मगर जंगल में तो पहले से ही हाय-तौबा मची हुई है। कुछ लोग जंगल को नष्ट करके वहां शहर बसाने पर आमादा हैं। ऐसे में वह शेर और मोटू-पतलू कैसे इस मुश्किल का हल निकालते हैं, यह इस फिल्म में दिखाया गया है।

सुहास कहते हैं कि यह फिल्म सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं है बल्कि इसे उनके मम्मी-पापा भी पसंद करेंगे क्योंकि मोटू-पतलू को उन्होंने भी पढ़ा है। फिर इस फिल्म में पर्यावरण को बचाने का जो संदेश दिया गया है, वह भी सभी के लिए है। खास बात यह भी है कि इस फिल्म के गाने गुलजार ने लिखे हैं और म्यूजिक विशाल भारद्वाज का है।