-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पहाड़गंज-नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित एक रंग-बिरंगी बस्ती जिसकी गलियों से ज़्यादातर दिल्ली वाले भी वाकिफ नहीं हैं। देसी-विदेशी सैलानियों के रुकने के लिए यहां बड़ी तादाद में छोटे, मझौले,
सस्ते, चलताऊ किस्म के होटल,
गेस्ट-हाऊस वगैरह हैं। विदेशों से आने वाले निचले दर्जे के सैलानियों के बीच खासी लोकप्रिय जगह है यह और ऐसी तमाम जगहें अपने जिन उलटे, बदनाम धंधों के लिए जानी जाती हैं, वो सब यहां होते होंगे,
ऐसा सुना और माना जाता है। निर्देशक राकेश रंजन कुमार की यह फिल्म इस बस्ती और इसके इर्द-गिर्द हो रही कुछ घटनाओं को दिखाती है।
पहाड़गंज-नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित एक रंग-बिरंगी बस्ती जिसकी गलियों से ज़्यादातर दिल्ली वाले भी वाकिफ नहीं हैं। देसी-विदेशी सैलानियों के रुकने के लिए यहां बड़ी तादाद में छोटे, मझौले,
सस्ते, चलताऊ किस्म के होटल,
गेस्ट-हाऊस वगैरह हैं। विदेशों से आने वाले निचले दर्जे के सैलानियों के बीच खासी लोकप्रिय जगह है यह और ऐसी तमाम जगहें अपने जिन उलटे, बदनाम धंधों के लिए जानी जाती हैं, वो सब यहां होते होंगे,
ऐसा सुना और माना जाता है। निर्देशक राकेश रंजन कुमार की यह फिल्म इस बस्ती और इसके इर्द-गिर्द हो रही कुछ घटनाओं को दिखाती है।