-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
2016 का साल। रांची की एस.पी. अमृता सिंह को बोकारो में हुए
1984 के सिक्ख विरोधी दंगों की जांच का जिम्मा मिला है। अमृता ने जांच शुरू की तो पता
चला कि जिस ऋषि रंजन को सबने दंगों की अगुआई करते देखा वह तो उसके अपने पिता गुरसेवक
सिंह ही हैं। क्या सचमुच ऋषि नरसंहार में शामिल था? तो फिर वह गुरसेवक क्यों बना? और उस मनजीत छाबड़ा यानी मनु का क्या हुआ जिससे वह प्यार करता
था। अब कुछ बोल क्यों नहीं रहा है ऋषि? आखिर क्या है बोकारो की छाती पर छप चुके चौरासी का वह सत्य जिसे
ऋषि आज भी अपने बूढ़े सीने में छुपाए बैठा है?
