Thursday, 13 July 2017

2017 से उम्मीदें अभी बाकी हैं


-दीपक दुआ...
 इस साल की पहली छमाही में आई फिल्में भले ही ज्यादा दमदार रही हों, बचे हुए छह महीनों में कई फिल्में हैं जिनसे उम्मीदें बांधी जा सकती हैं।
बिग बजट बड़ी उम्मीदें
शुरूआत जग्गा जासूससे होने जा रही है। निर्देशक अनुराग बसु और रणबीर कपूर की जोड़ी बरफीके बाद एक बार फिर कसौटी पर कसी जाएगी। रणबीर-कैटरीना कैफ की जोड़ी अजब प्रेम की गजब कहानीमें पसंद की ही गई थी। इधर ट्यूबलाइटके टिमटिमाने के बाद इस बिग-बजट मूवी पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। दर्शकों के बीच इस फिल्म की जो हवा बन रही है उसे देखते हुए इसकी कामयाबी का सबको यकीन है।

टाईगर श्राॅफ के साथ हीरोपंतीऔर बागीदे चुके निर्देशक सब्बीर खान की मुन्ना माइकलपर युवा दर्शकों की निगाहें हैं। नवाजुद्दीन सिद्दिकी को डांस करते हुए देखने के लिए भी लोग उत्सुक हैं। करीब 35 करोड़ के बजट में रही यह फिल्म औसत भी रही तो भी कमा जाएगी।

अनीस बज्मी की रोमांटिक काॅमेडी मुबारकांमें अर्जुन कपूर करण और चरण के डबल रोल में दिखेंगे। साथ में अनिल कपूर, इलेना डिक्रूज और सुनील शैट्टी की बेटी आथिया शैट्टी भी होंगी इस कन्फ्यूजन भरी काॅमेडी फिल्म से दर्शकों को हंसी की तगड़ी खुराक मिल सकती है।

इम्तियाज अली के निर्देशन में रिंगसे रहनुमासे रौलासे होती हुई आखिर जब हैरी मैट सेजलबनी शाहरुख खान-अनुष्का शर्मा की इस फिल्म को खुद शाहरुख की कंपनी ने बनाया है। पिछली कई फिल्मों से डावांडोल हो रहा शाहरुख का कैरियर इस फिल्म से कितना संभल पाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

अक्षय कुमार की अनोखे नाम वाली टाॅयलेट-एक प्रेम कथाधीरे-धीरे चर्चा में रही है। मुमकिन है कि यह फिल्म ज्यादातर राज्यों में टैक्स-फ्री होकर रिलीज हो और 15 अगस्त के मौके को भुना कर तगड़ी कामयाबी पा जाए।

अंडरवल्र्ड डाॅन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की जिंदगी पर बनी हसीना- क्वीन आॅफ मुंबईअब हसीना पारकरके नाम से आएगी जिसमें श्रद्धा कपूर टाइटल रोल में दिखाई देंगी। अंडरवल्र्ड की पृष्ठभूमि पर बनने वाली शतरंजी चालों वाली फिल्में पसंद करने वालों को यह फिल्म भा सकती है।

अजय देवगन और निर्देशक मिलन लूथरिया की हिट जोड़ी की बादशाहो’ 1975 की इमरजेंसी के वक्त की एक काल्पनिक कहानी को एक्शन के तड़के के साथ दिखाएगी। साथ में विद्युत जामवाल, इमरान हाशमी, इलेना डिक्रूज, ईशा गुप्ता और सनी लियोन भी। यानी मसाला कुछ ज्यादा ही रहने की उम्मीद है।

दो बायोपिक मैरी काॅमऔर सरबजीतदे चुके निर्देशक ओमंग कुमार की भूमिसंजय दत्त की बड़े पर्दे पर वापसी का रास्ता बनाएगी। एक पिता-पुत्री के रिश्तों की पृष्ठभूमि में जबर्दस्त थ्रिलर होने का दावा कर रही है यह फिल्म।

डेविड धवन के निर्देशन में उनके बेटे वरुण धवन जुड़वा 2’ में आएंगे जिसमें उनके डबल रोल का साथ निभाएंगी तापसी पन्नू और जैक्लिन फर्नांडीज। काॅमेडी भूमिकाओं में जंचने लगे वरुण अपने महारथी पिता के निर्देशन में इस फिल्म को सुपरहिट बनाने का सपना तो देख ही रहे होंगे।

दिवाली के हाॅट मौके पर रोहित शैट्टी की गोलमाल अगेनहंसी के बम-पटाखे फोड़ने रही है। रोहित की बनाई इस सीरिज की फिल्में पहले भी बंपर कामयाबी पाती रही हैं सो इस फिल्म से भी उम्मीदें बांधी जा सकती हैं।

संजय लीला भंसाली की पद्मावतीके रास्ते में यदि और रोड़े आए तो यह फिल्म इस साल सकती है। जाॅन अब्राहम वाली अभिषेक शर्मा के डायरेक्शन में बन रही परमाणु- स्टोरी आॅफ पोखरणभी इसी साल कतार में है।

साल का अंत सलमान खान की एक था टाईगरके सीक्वेल टाईगर जिंदा हैसे होगा जिसमें वह फिर कैटरीना कैफ के साथ दिखाई देंगे।

इनके अलावा अमिताभ बच्चन-ऋषि कपूर वाली उमेश शुक्ला की काॅमेडी फिल्म ‘102 नाॅट आउट’, ‘एयरलिफ्टदे चुके डायरेक्टर राजा कृष्णा मैनन की सैफ अली खान वाली शैफ’, सैफ की ही 'कालाकांडी', मृगदीप सिंह लांबा की फुकरे रिटर्न्स' आदि से भी काफी उम्मीदें हैं

स्वाद कुछ हट के
अलंकृता श्रीवास्तव की लिपस्टिक अंडर माय बुरकासेंसर से भिड़ने को लेकर पहले से ही चर्चा में हैं। चार औरतों की यौन-फंतासियों पर आधारित इस फिल्म का काफी बेसब्री से इंतजार हो रहा है। हार्ड-हिटिंग फिल्में देने में माहिर मधुर भंडारकर की इंदु सरकारŸार के दशक में लगे आपातकाल के दौरान की कुछ सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानी लेकर आएगी। फिल्म का ट्रेलर प्रभावी है मगर इधर पिछली कुछ फिल्मों से मधुर अपनी साख पर जो दाग लगवाए बैठे हैं तो यह फिल्म उनके लिए एसिड-टैस्ट भी साबित होगी। लीक से हट कर फिल्में देने वाले तिग्मांशु धूलिया की राग देशचर्चित लालकिला ट्रायलपर आधारित होगी। पिछले दिनों इसका ट्रेलर संसद में रिलीज किया गया था। राज्य सभा टी.वी. इस फिल्म के निर्माताओं में शामिल है। आखिरी अंगे्रज वायसराॅय लाॅर्ड माउंटबेटन के भारत आने, भारत को आजादी मिलने, देश का बंटवारा होने और उस दौर के राजनीतिक परिद्श्य के पीछे पनपते रिश्तों को खंगालने का दावा कर रही है गुरिंदर चड्ढा की फिल्म पार्टिशन 1947’ काबिल कलाकार पंकज त्रिपाठी की गुड़गांवऔर न्यूटनजैसी फिल्में भी इसी साल आएंगी। इनके अलावा नवाजुद्दीन सिद्दिकी-बिदिता बाग की बाबूमोशाय बंदूकबाज’, आयुष्मान खुराना की बरेली की बर्फीऔर शुभ मंगल सावधान’, श्रेयास तलपड़े की पोस्टर ब्वाॅयज’, आमिर खान के बैनर से आने वाली सीक्रेट सुपरस्टार’, हंसल मेहता की कंगना रानौत वाली सिमरन’, विशाल पंड्या की एडल्ट-थ्रिलर हेट स्टोरी 4’, विद्या बालन की रेडियो जाॅकी की भूमिका वाली तुम्हारी सुलु’, ‘प्यार का पंचनामावाली टीम की सोनू के टीटू की स्वीटीभी इसी साल आनी हैं। इस किस्म की फिल्में कब स्लीपर हिटसाबित हो जाएं, कहा नहीं जा सकता।
(दीपक दुआ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्मपत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज से घुमक्कड़। समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज़ पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)
 

Friday, 7 July 2017

रिव्यू-यह ‘माॅम’ तो बड़ी फिल्मी निकली रे

-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
दिल्ली की सड़कों पर एक बेटी के साथ गैंग-रेप हुआ और उसकी मां ने उन जालिमों को चुन-चुन कर मारा। अरे, इसी कहानी पर तो अभी कुछ हफ्ते पहले रवीना टंडन वाली फिल्म मातृआई थी। तो उसमें और इसमें क्या फर्क है? फर्क यह है कि उसके मुकाबले इसकी कहानी में थ्रिलर वाला टच ज्यादा है, इसमें कुछ और बड़े कलाकार भी हैं, इसमें ज्यादा पैसा लगा हुआ पर्दे पर दिखता है। तो क्या इससे यह फिल्म उससे बड़ी और बेहतर हो जाती है? जवाब है-बड़ी तो जरूर हुई है, बेहतर बस हल्की-सी ही हो पाई है।

एक बलात्कार पीड़िता की पीड़ा को मेकअप, अभिनय, भंगिमाओं और निर्देशन की कल्पनाशीलता का सहारा मिलने के बाद वे दृश्य कैसे प्रभावी हो उठते हैं, इसके लिए इस फिल्म को देखा जा सकता है। एक आरोपी के मरने की खबर सुनने के बाद उसका अपने कमरे के पर्दे को हल्का-सा खिसका कर बाहर की रोशनी को अंदर आने देना प्रतीक के तौर पर असर छोड़ता है। लेकिन एक बलात्कार पीड़िता का बाथरूम में शाॅवर के नीचे बैठे रहने का सीन हम भला और कितने दशकों तक देखेंगे?

इमोशनल मोर्चे पर तो फिल्म ठीक है लेकिन एक थ्रिलर के रूप में यह निराश करती है। कारण वही पुराना कि जब आप थ्रिलर बनाते हैं तो तर्कों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते और आपकी स्क्रिप्ट उन सारे सवालों के जवाब देती हो जो दर्शक के मन में उठ रहे हैं। लेकिन यहां ऐसा नहीं हो पाता। एक साधारण स्कूल टीचर, जिसे ऊंची आवाज में डांटना तक नहीं आता, कत्ल कर रही है और वह भी ऐसे सधे हुए अंदाज में कि जेम्स बाॅण्ड भी मात खा जाए। नहीं हुजूर, हजम नहीं हुआ, चूरण चटाइए हमें।

इसे श्रीदेवी की कमबैक फिल्म (आखिर कितनी बार वापस आएंगी वह?) कहा जा रहा है। इसके निर्माता उनके पति बोनी कपूर हैं तो जाहिर है कि इसमें उनका रोल सबसे लंबा और (गहरा भी) होना ही था। इसी लंबाई और गहराई को उन्होंने बाहुबलीमें महसूसा होता तो आज उन्हें राजमाता शिवगामी देवी के तौर पर भी प्रसिद्धि मिल रही होती। बहरहाल, श्रीदेवी के किरदार को फैलाने और दिखाने के चक्कर में यह फिल्म बाकी कई किरदारों को खा जाती है। अब ऐसे में नवाजुद्दीन सिद्दिकी हों, अक्षय खन्ना या श्रीदेवी के पति बने पाकिस्तानी कलाकार अदनान सिद्दिकी, सब हल्के ही लगते हैं। और ये फिल्मी पुलिस वाले गलत आदमी के पीछे पड़ने की बजाय पीड़ित के परिवार को धमकाना कब बंद करेंगे यार? श्रीदेवी की बेटी के रोल में पाकिस्तानी अदाकारा सजल अली का काम प्रभावी रहा है। खुद श्रीदेवी कुछ दृश्यों में असर छोड़ती हैं लेकिन उनकी हिन्दी का उच्चारण अभी तक इतना इडली-डोसे वाला क्यों है?

पहली फिल्म के तौर पर निर्देशक रवि उदयावर का प्रयास अच्छा है। उनमें संभावनाएं भी दिखती हैं लेकिन कुल मिला कर यह फिल्म बड़ी ही फिल्मी-सी है। यह कैसे हुआ, क्यों हुआ, उसने यह कैसे कर लिया, इतनी आसानी से उसे कैसे सब मिल गया, टाइप के सवाल अगर आपके मन में उठते हों तो घर बैठिए, नाहक ही थिएटर की कुर्सियों के हत्थे नोचेंगे। हां, टाइम पास के लिए इत्ती भी बुरी नहीं है यह।
अपनी रेटिंग-ढाई स्टार
(दीपक दुआ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्मपत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज से घुमक्कड़। समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज़ पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)