-दीपक दुआ...
फिल्म समीक्षकों की संस्था ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ हर साल की तरह इस बार भी ‘क्रिटिक्स चॉइस अवार्ड’ देने जा रही हैं। इस गिल्ड के सदस्यों में देश भर के नामी फिल्म समीक्षक हैं। इस बार होने जा रहे अवार्ड्स के लिए साल 2020 में रिलीज़ हुई ढेरों वेब-सीरिज़ को क्रिटिक्स की कई टीमों ने देखा और कई राउंड्स के बाद उनमें से चुनिंदा सीरिज़ को फाइनल में जगह मिली। अब इन सीरिज़ को गिल्ड के तमाम सदस्य रैंकिंग दे रहे हैं जिनमें से सर्वश्रेष्ठ को पुरस्कृत किया जाएगा। आप लोगों ने भी ये वेब-सीरिज़ देखी होंगी। आपकी नज़र में इन नामांकनों में से किसे अवार्ड मिलना चाहिए,
देखें और बताएं-
-दीपक दुआ...
भारत के चुनिंदा फिल्म समीक्षकों की संस्था ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ हर साल की तरह इस बार भी ‘क्रिटिक्स चॉइस अवार्ड’ देने जा रही हैं। अनुपमा चोपड़ा की अध्यक्षता वाली इस गिल्ड के सदस्यों में देश भर के नामी फिल्म समीक्षक हैं। इस बार होने जा रहे अवार्ड्स के लिए आईं सैंकड़ों शॉर्ट-फिल्मों को क्रिटिक्स की कई टीमों ने देखा और कई राउंड्स के बाद चुनिंदा फिल्मों को फाईनल में जगह मिली। अब इन फिल्मों को गिल्ड के तमाम सदस्य रैंकिंग दे रहे हैं जिनमें से सर्वश्रेष्ठ को पुरस्कृत किया जाएगा। इन फिल्मों में से काफी सारी किसी न किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। चाहें तो आप भी इन्हें देख सकते हैं। कुछ के लिंक इस आलेख में भी हैं। आइए, ज़रा इन पांच पुरस्कारों के लिए नामांकित हुई फिल्मों पर नज़र डालें-
रामप्रसाद जी सिधार गए। अब उनके चारों बेटे, बहुएं,
दोनों बेटियां, दामाद,
उन सब के बच्चे, मामा,
ताऊ,
अलां-फलां आ पहुंचे हैं लखनऊ। अब आएं हैं तो तेहरवीं तक भी रुकेंगे ही। वैसे कभी इन्होंने रिश्तों को गर्माहट न दी लेकिन अब इन्हें फिक्र है पैसों की, कर्जे की, दुकान-मकान की और मां को कौन रखे,
इसकी। अब तेरह दिन साथ रहेंगे और दो नई बातें होंगी तो चार पुरानी भी खोदी ही जाएंगी। उलझे हुए रिश्तों की सलवटें भी सामने आएंगी और मुमकिन है कि कुछ सुलझ ही जाए, कोई टूटा तार जुड़ कर इनकी ज़िंदगी के सुर सही बिठा ही दे।