-दीपक दुआ...
सूरज ढलने के बाद किसी किले में बैठ कर लाइट एंड साउंड शो के जरिए वहां के इतिहास से रूबरू होना मुझे हमेशा से भाता रहा है। आगरा के किले में रोज़ाना शाम होने वाले लाइट एंड साउंड शो के बारे में काफी सुना था। कई बार आगरा जाना हुआ लेकिन इस शो को देखने का वक्त नहीं निकल पाया। इस बार वहां गए तो पहले ही दिन सूरज ढलने से पहले हम लोग वहां पहुंच गए। सोचा, कुछ खा-पीकर अंदर चलेंगे। लेकिन किले के बाहर सिवाय एक गंदे-से ढाबे,
दो-एक आइस्क्रीम, कोल्ड-ड्रिंक के ठेलों और एक गोलगप्पे वाले के,
और कुछ भी नहीं था। पहले यहां कई ढाबे हुआ करते थे लेकिन अब प्रशासन ने उन्हें हटा दिया है। अब इस जगह पर यू.पी. टूरिज़्म या आगरा प्रशासन कोई कैफेटेरिया, रेस्टोरेंट वगैरह भी तो बना सकता है। खैर...!
सूरज ढलने के बाद किसी किले में बैठ कर लाइट एंड साउंड शो के जरिए वहां के इतिहास से रूबरू होना मुझे हमेशा से भाता रहा है। आगरा के किले में रोज़ाना शाम होने वाले लाइट एंड साउंड शो के बारे में काफी सुना था। कई बार आगरा जाना हुआ लेकिन इस शो को देखने का वक्त नहीं निकल पाया। इस बार वहां गए तो पहले ही दिन सूरज ढलने से पहले हम लोग वहां पहुंच गए। सोचा, कुछ खा-पीकर अंदर चलेंगे। लेकिन किले के बाहर सिवाय एक गंदे-से ढाबे,
दो-एक आइस्क्रीम, कोल्ड-ड्रिंक के ठेलों और एक गोलगप्पे वाले के,
और कुछ भी नहीं था। पहले यहां कई ढाबे हुआ करते थे लेकिन अब प्रशासन ने उन्हें हटा दिया है। अब इस जगह पर यू.पी. टूरिज़्म या आगरा प्रशासन कोई कैफेटेरिया, रेस्टोरेंट वगैरह भी तो बना सकता है। खैर...!