शेक्सपियर के रचे ने फिल्मकारों को हमेशा से लुभाया है। खासतौर से उनके ‘मैक्बेथ’ के प्रति तो दुनिया भर के फिल्मकारों में आसक्ति रही है। फिर चाहे वह जापान के अकीरा कुरोसावा की ‘थ्रोन ऑफ ब्लड’ (1957)
हो या विशाल भारद्वाज की ‘मक़बूल’ (2004),
इस नाटक का पर्दे पर किया गया चित्रण हर बार कुछ अलग, कुछ गहरा ही रहा है। लेकिन हाल ही में अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई मलयालम फिल्म ‘जोजी’ में निर्देशक दिलीश पोथान हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। एक ऐसी दुनिया, कि अगर बताया न जाए तो इसमें ‘मैक्बेथ’ की कहानी को पकड़ पाना मुश्किल हो सकता है। दरअसल दिलीश ने मूल कहानी के सार को लेते हुए उसमें अपने डाले किरदारों, उन किरदारों की विशेषताओं, उनकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के ज़रिए अपनी बात कही है।
