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Tuesday, 13 April 2021

रिव्यू-‘जोजी’ मज़बूत सही मक़बूल नहीं

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
शेक्सपियर के रचे ने फिल्मकारों को हमेशा से लुभाया है। खासतौर से उनकेमैक्बेथके प्रति तो दुनिया भर के फिल्मकारों में आसक्ति रही है। फिर चाहे वह जापान के अकीरा कुरोसावा कीथ्रोन ऑफ ब्लड’ (1957) हो या विशाल भारद्वाज कीमक़बूल’ (2004), इस नाटक का पर्दे पर किया गया चित्रण हर बार कुछ अलग, कुछ गहरा ही रहा है। लेकिन हाल ही में अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई मलयालम फिल्मजोजीमें निर्देशक दिलीश पोथान हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। एक ऐसी दुनिया, कि अगर बताया जाए तो इसमेंमैक्बेथकी कहानी को पकड़ पाना मुश्किल हो सकता है। दरअसल दिलीश ने मूल कहानी के सार को लेते हुए उसमें अपने डाले किरदारों, उन किरदारों की विशेषताओं, उनकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के ज़रिए अपनी बात कही है।