-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
बरसों पहले ‘मर्द’
फिल्म में दारा सिंह ने अपने दुधमुंहे बच्चे की छाती पर चाकू की नोक से ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ उकेर दिया था। ज़रा सोचिए कि अगर किसी को सचमुच दर्द न हो तो...? इस फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ का हीरो सूर्या ऐसा ही है। बचपन से ही उसे यह अजीब-सी ‘बीमारी’
है कि उसे दर्द, चुभन,
खुजली जैसा कुछ भी महसूस नहीं होता (हां, बड़े होकर ‘कुछ’ और ज़रूर महसूस होता है)। कुंगफू-कराटे वाली और बॉलीवुड की घिसी-पिटी एक्शन फिल्में देख कर वह बड़ा होता है और इन फिल्मों के नायकों की तरह समाज में फैले हुए पाप को जला कर राख कर देना चाहता है।
बरसों पहले ‘मर्द’
फिल्म में दारा सिंह ने अपने दुधमुंहे बच्चे की छाती पर चाकू की नोक से ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ उकेर दिया था। ज़रा सोचिए कि अगर किसी को सचमुच दर्द न हो तो...? इस फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ का हीरो सूर्या ऐसा ही है। बचपन से ही उसे यह अजीब-सी ‘बीमारी’
है कि उसे दर्द, चुभन,
खुजली जैसा कुछ भी महसूस नहीं होता (हां, बड़े होकर ‘कुछ’ और ज़रूर महसूस होता है)। कुंगफू-कराटे वाली और बॉलीवुड की घिसी-पिटी एक्शन फिल्में देख कर वह बड़ा होता है और इन फिल्मों के नायकों की तरह समाज में फैले हुए पाप को जला कर राख कर देना चाहता है।