Showing posts with label radhika madan. Show all posts
Showing posts with label radhika madan. Show all posts

Sunday, 15 March 2020

रिव्यू-आधी पास-आधी फेल ‘अंग्रेज़ी मीडियम’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पिता-वह मूर्ख प्राणी जो अपने बच्चों की खुशी के लिए किसी भी हद तक जा सकता हैकी टैगलाइन के साथ शुरू होने वाली यह फिल्म राजस्थान के उदयपुर की तारिका बंसल की लंदन के एक मशहूर और महंगे कॉलेज में पढ़ने की ख्वाहिश को पूरा करने की उसके पिता चंपक बंसल की कोशिशों और संघर्ष को दिखाती है। अपना सब कुछ दांव पर लगा कर भी चंपक अपनी बेटी के सपने को पूरा करने में जुटा रहता है। उसे लगता है कि अपनी पत्नी के आगे पढ़ने का सपना पूरा करके उसके जो गुनाह किया है, अपनी बेटी की इच्छा पूरी करके वह उसका प्रायश्चित कर सकेगा।

Thursday, 21 March 2019

रिव्यू-यह मर्द सर्द है, इसे दर्द नहीं होता

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
बरसों पहले मर्दफिल्म में दारा सिंह ने अपने दुधमुंहे बच्चे की छाती पर चाकू की नोक से मर्द को दर्द नहीं होताउकेर दिया था। ज़रा सोचिए कि अगर किसी को सचमुच दर्द हो तो...? इस फिल्म मर्द को दर्द नहीं होताका हीरो सूर्या ऐसा ही है। बचपन से ही उसे यह अजीब-सी बीमारीहै कि उसे दर्द, चुभन, खुजली जैसा कुछ भी महसूस नहीं होता (हां, बड़े होकर कुछऔर ज़रूर महसूस होता है) कुंगफू-कराटे वाली और बॉलीवुड की घिसी-पिटी एक्शन फिल्में देख कर वह बड़ा होता है और इन फिल्मों के नायकों की तरह समाज में फैले हुए पाप को जला कर राख कर देना चाहता है।

Saturday, 29 September 2018

रिव्यू-‘पटाखा’ फूटा मगर धीमे से

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अगर आप विशाल भारद्वाज की फिल्मों के फैन हैं तो आपने इस फिल्म का ट्रेलर जरूर देखा होगा। और अगर आपने इस फिल्म का ट्रेलर देखा है तो आपको इंटरवल तक की फिल्म देखने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। जी हां, इंटरवल तक की फिल्म के सारे अहम दृश्य ट्रेलर में चुके हैं। आप चाहें तो इंटरवल तक एक अच्छी नींद ले सकते हैं। अब रही बात इंटरवल के बाद की। तो यह हिस्सा भी आपको तभी पसंद आएगा जब आपके अंदर विशाल भारद्वाज की फिल्मों के लिए मजनू-रांझा वाली दीवानगी हो। वरना इस दौरान भी आप सो सकते हैं। अब पैसे खर्च के थिएटर में सोने ही जाना है, तो आपकी मर्जी।