-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
एक था राजा, एक थी रानी, दोनों मर गए... जी नहीं, कहानी यहां खत्म नहीं हुई। राजकुमार बच गया और बरसों
बाद वह उसी राज्य में लौटा जहां का दुष्ट मंत्री उसके पिता को मार कर खुद राजा बन बैठा
था। इस दुष्ट राजा के बेटे की होने वाली संगिनी से राजकुमार को प्यार हो गया और...
आगे की कहानी भी बताई जाए क्या...?
एक था राजा, एक थी रानी, दोनों मर गए... जी नहीं, कहानी यहां खत्म नहीं हुई। राजकुमार बच गया और बरसों
बाद वह उसी राज्य में लौटा जहां का दुष्ट मंत्री उसके पिता को मार कर खुद राजा बन बैठा
था। इस दुष्ट राजा के बेटे की होने वाली संगिनी से राजकुमार को प्यार हो गया और...
आगे की कहानी भी बताई जाए क्या...?सिर्फ ऐतिहासिक विषयों पर फिल्में बनाने की जिद पकड़े
बैठे आशुतोष गोवारीकर ने सिंधु घाटी सभ्यता के मोहेंजो दारो नगर को अपनी कहानी की पृष्ठभूमि
में रखा है। समय है ईसा से 2016 साल पहले का। उस दौर के बारे में जो जानकारी अभी तक
मिल पाई है उसमें अपनी कल्पनाओं को जोड़ते हुए आशुतोष और उनकी टीम ने एक भव्य नगर और
वहां के लोगों की जीवनशैली को उकेरा है। लेकिन जिस कहानी के चारों तरफ इसे लपेटा जाना
था वह बेहद कमजोर और साधारण है और इसीलिए यह फिल्म सिर्फ टुकड़ों-टुकड़ों में ही असर
छोड़ती है। नायक-नायिका के प्यार की खुशबू महसूस नहीं हो पाती। दुष्ट राजा के अत्याचार
क्रूर नहीं लगते। भावनाएं कचोट नहीं पातीं। हास्य तो खैर है ही नहीं। हां, एक्शन जरूर बढ़िया है और वह लुभाता भी है।