-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
एक औरत और उसका प्रेमी मज़े करके लौट रहे हैं। रास्ते में एक हादसा होता है। पुलिस बुलाई तो दोनों के घरों में पता चला जाएगा। सो, उसे दुनिया से छुपाने के लिए यह एक झूठ गढ़ते हैं, फिर दूसरा,
तीसरा...। तभी प्रेमी का खून हो जाता है और यह औरत उसे मारने के इल्ज़ाम में पकड़ी जाती है। लेकिन इसका कहना है कि वह बेकसूर है। एक नामी वकील को वह सारी कहानी सुनाती है। परत-दर-परत सच सामने आने लगता है। क्या है सच? क्या उस हादसे और इस खून में कोई नाता है? और यहां कौन, किससे बदला ले रहा है? किस बात का बदला?
एक औरत और उसका प्रेमी मज़े करके लौट रहे हैं। रास्ते में एक हादसा होता है। पुलिस बुलाई तो दोनों के घरों में पता चला जाएगा। सो, उसे दुनिया से छुपाने के लिए यह एक झूठ गढ़ते हैं, फिर दूसरा,
तीसरा...। तभी प्रेमी का खून हो जाता है और यह औरत उसे मारने के इल्ज़ाम में पकड़ी जाती है। लेकिन इसका कहना है कि वह बेकसूर है। एक नामी वकील को वह सारी कहानी सुनाती है। परत-दर-परत सच सामने आने लगता है। क्या है सच? क्या उस हादसे और इस खून में कोई नाता है? और यहां कौन, किससे बदला ले रहा है? किस बात का बदला?