-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
हिन्दी फिल्में लड़कियों को लगातार सशक्त दिखाने लगी हैं। ‘दंगल’ ने ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के’ कहा था तो ‘पूर्णा’ अब ‘लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं’ का नारा बुलंद कर रही है। इन दोनों फिल्मों की कहानी एक जैसी लग सकती है लेकिन दोनों में काफी फर्क है और सच यह है कि ‘पूर्णा’ में ज्यादा गहरी बातें कही गई हैं। बस, दिक्कत यह रही कि इस फिल्म को आमिर खान जैसा कोई बड़ा स्टार न मिल सका नहीं तो यह भी टिकट-खिड़की पर धमाल करती।
