-दीपक दुआ...
पिछले आलेख में आपने पढ़ा कि पटनीटॉप पहुंच कर हमने कुदरती नज़ारे तो बहुत देखे लेकिन
बारिश के चलते हम ज़्यादा घूम-फिर नहीं पाए और बिजली से गर्म होने वाले कंबलों में दुबके
रहे (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। अगली सुबह मौसम बिल्कुल साफ था और हमारा
मन था कि नाश्ते के बाद नत्था टॉप के लिए निकल जाएं। लेकिन वहां नया कुछ मिलना नहीं
था और यहां गुनगुनी धूप में बैठ कर सामने बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों को निहारना
ज़्यादा सुख दे रहा था। सो, यहां कुछ और वक्त बिताने
के बाद हमने जम्मू का रास्ता पकड़ लिया। रास्ते में एक बार फिर से कुद में ‘प्रेम दी
हट्टी’ से पतीसा पैक करवाया और कुछ ही घंटे में हम लोग जम्मू शहर में ‘जामवंत गुफा’
के दर्शन के लिए जा पहुंचे। मान्यता है कि भगवान राम के सहयोगी ऋक्षपति (रीछ) जामवंत
ने यहां तपस्या की थी। यहां के बाद हमारा अगला पड़ाव था जम्मू रेलवे स्टेशन के बिल्कुल
करीब बना हुआ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का होटल ‘वैष्णवी धाम’ जहां मैंने दो महीने
पहले ही एक सुइट बुक करवा लिया था।