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Sunday, 9 August 2020

यात्रा-जम्मू और चिनाब किनारे अखनूर (भाग-10-अंतिम किस्त)

-दीपक दुआ...
पिछले आलेख में आपने पढ़ा कि पटनीटॉप पहुंच कर हमने कुदरती नज़ारे तो बहुत देखे लेकिन बारिश के चलते हम ज़्यादा घूम-फिर नहीं पाए और बिजली से गर्म होने वाले कंबलों में दुबके रहे (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। अगली सुबह मौसम बिल्कुल साफ था और हमारा मन था कि नाश्ते के बाद नत्था टॉप के लिए निकल जाएं। लेकिन वहां नया कुछ मिलना नहीं था और यहां गुनगुनी धूप में बैठ कर सामने बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों को निहारना ज़्यादा सुख दे रहा था। सो, यहां कुछ और वक्त बिताने के बाद हमने जम्मू का रास्ता पकड़ लिया। रास्ते में एक बार फिर से कुद में ‘प्रेम दी हट्टी’ से पतीसा पैक करवाया और कुछ ही घंटे में हम लोग जम्मू शहर में ‘जामवंत गुफा’ के दर्शन के लिए जा पहुंचे। मान्यता है कि भगवान राम के सहयोगी ऋक्षपति (रीछ) जामवंत ने यहां तपस्या की थी। यहां के बाद हमारा अगला पड़ाव था जम्मू रेलवे स्टेशन के बिल्कुल करीब बना हुआ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का होटल ‘वैष्णवी धाम’ जहां मैंने दो महीने पहले ही एक सुइट बुक करवा लिया था।

Saturday, 8 August 2020

यात्रा-पटनीटॉप में डरते-डरते किए मज़े (भाग-9)

-दीपक दुआ...
पिछले आलेख में आपने पढ़ा कि कटरा से चल कर उधमपुर के जखानी पार्क में घूमने और कुद का मशहूर व स्वादिष्ट ‘प्रेम पतीसा’ खाते हुए हम लोग पटनीटॉप की एक बड़ी-सी कॉटेज में पहुंच चुके थे। हमारे पास पूरे 24 घंटे थे और यहां घूमने के लिए इतना वक्त काफी था। लेकिन हमें क्या पता था कि हमारे अरमानों पर ‘पानी’ पड़ने वाला था (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। कॉटेज में सामान रख कर हम लोग फौरन बाहर आ गए ताकि लंच करके घूमने निकल सकें। यहां पर एक कॉटेज से दूसरा कॉटेज कम से कम दो सौ मीटर दूर था। ठीक सामने एक बड़ा मैदान था जिसमें दो-तीन अस्थाई दुकानें सजी हुई हैं। एक कश्मीरी ड्रैस में फोटो खींचने वाले की दुकान थी और एक-दो शॉल-सूट बेचने वालों की। अभी हम यहां का जायज़ा लेते हुए फोटो खींच ही रहे थे कि मैदान के उस पार खड़े घोड़े वाले हमारे पास आकर हमें जंगल की सैर करने के लिए मनाने लग गए। हमने मना किया तो उनमें से एक बोला-सर आप लोग आते हो तो हमारे बच्चे रोटी खाते हैं। अभी सीज़न नहीं है तो सुबह से खाली बैठे हैं। उसकी इस इमोशनल ब्लैकमेलिंग ने असर किया और श्रीमती का आदेश पा कर हम चार जने तीन घोड़ों पर सवार होकर जंगल की सैर पर चल दिए।

Friday, 7 August 2020

यात्रा-उधमपुर का जखानी पार्क और कुद का प्रेम-पतीसा (भाग-8)

-दीपक दुआ...
पिछले आलेख में आपने पढ़ा कि कटरा के आसपास काफी घूमने के बाद अब हम लोग पटनीटॉप जाने के लिए तैयार हो चुके थे। पटनीटॉप दरअसल कटरा से करीब 85 किलोमीटर दूर जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर एक छोटा-सा हिल-स्टेशन है। (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) पहले यह जगह ज़्यादा मशहूर नहीं थी लेकिन 90 के दशक में कश्मीर घाटी में बढ़ते आतंकवाद के बाद इसे एक वैकल्पिक हिल-स्टेशन के तौर पर विकसित किया गया और धीरे-धीरे यह मशहूर होता चला गया। मैं यहां पहली बार 1998 में अपने दोस्त विपुल के साथ आया था। तभी से मेरी तमन्ना थी कि कभी इस जगह पर एक रात गुज़ारी जाए। अभी भी बहुत सारे लोग टैक्सी या टूरिस्ट बसों द्वारा कटरा से सुबह चल कर यहां आते हैं और शाम तक यहां से लौट जाते हैं। लेकिन हमें तो यहां भरपूर आनंद लेना था।

Thursday, 6 August 2020

यात्रा-धनसर बाबा-सिहाड़ बाबा और पटनीटॉप की तैयारी (भाग-7)

-दीपक दुआ...
धनसर बाबा
पिछले आलेख में आपने पढ़ा कि हम लोग कटरा से गाड़ी करके निकले तो ‘बाबा जित्तो’ और ‘नौ देवी’ के दर्शन कर चुके थे। अब हमें ‘धनसर बाबा’ पहुंचना था। कटरा के आसपास की तमाम जगहों में से यह मेरी पसंदीदा जगह है और यहीं पर बरसों पहले मेरी दोस्ती अनिल से हुई थी जिसका ज़िक्र मैंने पिछले आलेख में किया था। (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) धनसर बाबा का मंदिर कटरा से करीब 12 किलोमीटर दूर है। मुख्य सड़क से करीब दो सौ मीटर सीढ़ियां उतर कर जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बहुत मान्यता है। माना जाता है धनसर बाबा भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। यहां पर गुफा के अंदर व ऊपर से हर समय जहां-तहां पानी गिरता रहता है जो इतना साफ और सुरम्य है कि मन करता है, इसे देखते ही रहें। यहां हमने एक वीडियो भी बनाया जिसे देखने के लिए यहां क्लिक करें। यह पानी बहता हुआ नीचे उसी छोटी-सी धारा में जा मिलता है जो पीछे नौ देवी की तरफ से आती है। इसमें काफी लोग स्नान भी करते हैं। यहां एक छोटी-सी कैंटीन भी है। यह जगह इतनी शांत और सुहानी है कि यहां घंटों बैठे रहने को दिल चाहता है।