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Wednesday, 26 May 2021

ओल्ड रिव्यू-डराती नहीं उलझाती है ‘फोबिया’

हॉरर फिल्में मुझे निजी तौर पर काफी पसंद हैं। मेरी तरह बहुतेरे लोग हैं जो सिनेमा के पर्दे से टपकते डरको देख कर आनंदित होते हैं। मैं यह भी स्वीकार करना चाहूंगा कि डरावनी या हॉरर फिल्में देखते हुए मुझे आमतौर पर डर नहीं लगता। लेकिन जितना मुझे पवन कृपलानी कीरागिनी एम.एम.एस.’ ने डराया था उतना शायद किसी और फिल्म ने नहीं। मैं आज तक इस फिल्म को दोबारा नहीं देख पाया। उनकीडर एट मॉलभी मुझे अच्छी लगी थी। ऐसे में उन्हीं की तीसरी फिल्मफोबियादेखने के विचार से ही मैं उत्साहित था। लेकिन मेरे उत्साह पर इस फिल्म ने पानी बिखेर दिया-ठंडा पानी...!