-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सच कहूं तो ‘हीरो’ को देखने के लिए जाने से पहले ही मैं इसे लेकर काफी नाउम्मीद था। मैं ही नहीं बल्कि इसके प्रोमोज़ देखने के बाद काफी सारे लोगों को यह लग रहा था कि यह 1983 में आई सुभाष घई की जैकी श्रॉफ-मीनाक्षी शेषाद्रि वाली ‘हीरो’ का आधुनिक रीमेक भले ही हो लेकिन इसमें वैसा दम नहीं होगा जो उस ‘हीरो’ में था। लेकिन एक समीक्षक के नाते मैंने हमेशा यह माना है कि हर फिल्म एक अलहदा प्रॉडक्ट होती है और उसे उसी की खूबियों-खामियों पर ही तौला जाना चाहिए। इसलिए इस ‘हीरो’ को देखते समय बार-बार उस ‘हीरो’ की याद आने के बावजूद मैं इसे इसी की खामियों (खूबियां मुझे इसमें मिली नहीं) पर तौल रहा हूं।