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Friday, 11 September 2020

ओल्ड रिव्यू-‘हीरो’ नहीं ज़ीरो है यह

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सच कहूं तोहीरोको देखने के लिए जाने से पहले ही मैं इसे लेकर काफी नाउम्मीद था। मैं ही नहीं बल्कि इसके प्रोमोज़ देखने के बाद काफी सारे लोगों को यह लग रहा था कि यह 1983 में आई सुभाष घई की जैकी श्रॉफ-मीनाक्षी शेषाद्रि वालीहीरोका आधुनिक रीमेक भले ही हो लेकिन इसमें वैसा दम नहीं होगा जो उसहीरोमें था। लेकिन एक समीक्षक के नाते मैंने हमेशा यह माना है कि हर फिल्म एक अलहदा प्रॉडक्ट होती है और उसे उसी की खूबियों-खामियों पर ही तौला जाना चाहिए। इसलिए इसहीरोको देखते समय बार-बार उसहीरोकी याद आने के बावजूद मैं इसे इसी की खामियों (खूबियां मुझे इसमें मिली नहीं) पर तौल रहा हूं।