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Friday, 11 September 2020

ओल्ड रिव्यू-‘हीरो’ नहीं ज़ीरो है यह

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सच कहूं तोहीरोको देखने के लिए जाने से पहले ही मैं इसे लेकर काफी नाउम्मीद था। मैं ही नहीं बल्कि इसके प्रोमोज़ देखने के बाद काफी सारे लोगों को यह लग रहा था कि यह 1983 में आई सुभाष घई की जैकी श्रॉफ-मीनाक्षी शेषाद्रि वालीहीरोका आधुनिक रीमेक भले ही हो लेकिन इसमें वैसा दम नहीं होगा जो उसहीरोमें था। लेकिन एक समीक्षक के नाते मैंने हमेशा यह माना है कि हर फिल्म एक अलहदा प्रॉडक्ट होती है और उसे उसी की खूबियों-खामियों पर ही तौला जाना चाहिए। इसलिए इसहीरोको देखते समय बार-बार उसहीरोकी याद आने के बावजूद मैं इसे इसी की खामियों (खूबियां मुझे इसमें मिली नहीं) पर तौल रहा हूं।

Sunday, 9 August 2020

रिव्यू-चरमराते रिश्तों का सस्पैंस सुलझाती ‘रात अकेली है’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
शहर के प्रतिष्ठित रईस ठाकुर रघुबीर सिंह का कत्ल हुआ है। उन्हीं के घर में, उन्हीं की बंदूक से, उन्हीं के परिवार के बीच। उनकी दूसरी शादी की रात को। ज़ाहिर है कि कातिल कोई घर का ही आदमी है। या फिर कोई औरत...? वो औरत, जो कल तक उनकी रखैल थी और आज शादी के बाद ठकुराईन? कत्ल की तफ्तीश इंस्पैक्टर जटिल यादव के ज़िम्मे है। नाम का जटिल लेकिन सुलझी हुई सोच वाला एक ऐसा इंसान जो सच को कहीं से भी खोद कर निकालने की हिम्मत और कुव्वत रखता है। पर क्या जटिल सुलझा पाएगा इस केस को, जिसके धागे खुलेंगे तो कइयों की नंगई सामने आएगी?

Friday, 1 June 2018

रिव्यू-नाम ‘फेमस’ हतो, फिलिम नाहीं

-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
चंबल का इलाका। बंदूक के दम पर खुद को धाकड़ मानता एक शख्स। उस धाकड़ के दम पर इलाके में अपनी बादशाहत चलाता एक नेता। जाहिर है हर चीज का वक्त पूरा होता है। एक दिन इनका भी हुआ। कुछ ऐसे लोगों ने बंदूक उठा कर इन्हें जमीन पर गिरा दिया जिन्हें ये लोग कमज़ोर समझा करते थे।

Friday, 28 July 2017

रिव्यू-बजना चाहिए ‘राग देश’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इतिहास के साथ दिक्कत सिर्फ यही नहीं है कि उसे अलग-अलग नजरिए से लिखा और लिखवाया गया बल्कि यह भी है कि उसे सत्तानशीनों की सुविधानुसार परोसा और पढ़ाया गया। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को ही लें तो आमजन के लिए यह ज्यादातर गांधी और नेहरू के इर्द-गिर्द ही घूमता है। इनके विरोधी रहे नेताओं, सेनानियों को या तो इतिहास लेखकों ने महत्व नहीं दिया या फिर उनके लिखे को आम लोगों तक सुगमता से नहीं पहुंचाया गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिन्द सेना के बारे में ही हम कितना जानते हैं? तिग्मांशु धूलिया की यह फिल्म राग देशइस कमी को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक और जरूरी कदम कही जा सकती है।