कुछ महीने पहले ‘राज़ी’ के रिव्यू में मैंने लिखा था-‘राज़ी’ जैसी फिल्में बननी चाहिएं। ऐसी कहानियां कही जानी चाहिएं। ये हमारी सोच को उद्वेलित भले न करें,
उसे प्रभावित ज़रूर करती हैं। फिर ‘परमाणु-द स्टोरी ऑफ पोखरण’ के रिव्यू में मेरी लाइनें थीं-अखबार में जब आप पढ़ते हैं कि ‘भारत ने परमाणु परीक्षण किया’
तो इसके पीछे असल में कितने सारे लोगों की मेहनत लगी होती है। कितने सारे लोगों ने उसमें अपने और अपनों के सपनों की आहुति दी होती है। और बस, यहीं आकर यह एक ज़रूरी फिल्म हो जाती है। ‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’ इसी कड़ी की अगली फिल्म है जो न सिर्फ आपको उद्वेलित करती है बल्कि अपने ज़रूरी होने का अहसास भी कराती है।
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Tuesday, 8 January 2019
रिव्यू-ज़रूरी हैं ‘उरी’ जैसी फिल्में
कुछ महीने पहले ‘राज़ी’ के रिव्यू में मैंने लिखा था-‘राज़ी’ जैसी फिल्में बननी चाहिएं। ऐसी कहानियां कही जानी चाहिएं। ये हमारी सोच को उद्वेलित भले न करें,
उसे प्रभावित ज़रूर करती हैं। फिर ‘परमाणु-द स्टोरी ऑफ पोखरण’ के रिव्यू में मेरी लाइनें थीं-अखबार में जब आप पढ़ते हैं कि ‘भारत ने परमाणु परीक्षण किया’
तो इसके पीछे असल में कितने सारे लोगों की मेहनत लगी होती है। कितने सारे लोगों ने उसमें अपने और अपनों के सपनों की आहुति दी होती है। और बस, यहीं आकर यह एक ज़रूरी फिल्म हो जाती है। ‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’ इसी कड़ी की अगली फिल्म है जो न सिर्फ आपको उद्वेलित करती है बल्कि अपने ज़रूरी होने का अहसास भी कराती है।
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