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Friday, 21 February 2020

रिव्यू-डराने में कामयाब है यह ‘भूत’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई के जुहू बीच पर जाने कहां से एक पुराना जहाज फंसा है। जहाज पर कोई नहीं है। शिपिंग कॉरपोरेशन के अफसर को जहाज की जांच में अहसास होता है कि यहां अजीबोगरीब हरकतें होती हैं। उसे लगता है कि यहां कोई है। कौन...? कोई भूत या फिर...! क्या यह हकीकत है या सिर्फ उसका वहम क्योंकि खुद उसे भी तो अक्सर अपनी मरी हुई बीवी और बेटी दिखाई देती रहती हैं। कैसे मुक्ति दिलाएगा वह इस भूतको और इस जहाज को? और क्या इसी में ही छुपी है खुद उसकी भी मुक्ति?

Monday, 24 June 2019

ओल्ड रिव्यू-रमन राघव-न काला न सफेद

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुबारक हो, अनुराग कश्यप लौट आए हैं। वही अनुराग जो जिंदगी के, इंसानी मन के और समाज के अंधेरे कोनों को दिखाने में महारथ रखते हैं।
एक साइको किलर। किसी को भी किसी भी वजह से या बेवजह मारने वाला।
एक पुलिस अफसर। नशेड़ी। कभी भी किसी को भी मारने वाला।
क्या फर्क है दोनों में? एक अपराधी है और दूसरा मकसद से मार रहा है? नहीं। यहां अपराधी और पुलिस का फर्क नहीं है। पहला खुलेआम मार रहा है, दूसरा वर्दी की आड़ में। पहले को दूसरे की तलाश है और दूसरे को पहले की। पर क्यों?

Tuesday, 8 January 2019

रिव्यू-ज़रूरी हैं ‘उरी’ जैसी फिल्में

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
कुछ महीने पहले ‘राज़ी’ के रिव्यू में मैंने लिखा था-राज़ीजैसी फिल्में बननी चाहिएं। ऐसी कहानियां कही जानी चाहिएं। ये हमारी सोच को उद्वेलित भले करें, उसे प्रभावित ज़रूर करती हैं। फिर ‘परमाणु-द स्टोरी ऑफ पोखरण’ के रिव्यू में मेरी लाइनें थीं-अखबार में जब आप पढ़ते हैं कि भारत ने परमाणु परीक्षण कियातो इसके पीछे असल में कितने सारे लोगों की मेहनत लगी होती है। कितने सारे लोगों ने उसमें अपने और अपनों के सपनों की आहुति दी होती है। और बस, यहीं आकर यह एक ज़रूरी फिल्म हो जाती है। उरी- सर्जिकल स्ट्राइकइसी कड़ी की अगली फिल्म है जो सिर्फ आपको उद्वेलित करती है बल्कि अपने ज़रूरी होने का अहसास भी कराती है।

Friday, 14 September 2018

रिव्यू-‘प्यार’ और ‘फ्यार’ के बीच झूलती ‘मनमर्ज़ियां’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
छोटे शहर की बोल्ड-बिंदास लड़की। अपने बॉय-फ्रैंड के साथ मौज-मज़े करती लड़की। दुनिया भर से पंगा लेती, भिड़ती लड़की। विदेश से शादी करने आया एक सीधा लड़का। आते ही उसे भा गई यह लड़की। उसकी हकीकत जान कर भी उससे शादी करने को तुला लड़का। (तनु वैड्स मनुयाद रही है...?) मर्ज़ी होते हुए भी लड़की ने कर ली इस सीधे लड़के से शादी। लड़की अब भी बगावती तेवर अपनाए हुए है और लड़का उसका दिल जीतने में लगा है। यहां तक कि लड़की की खुशी के लिए वह उसे छोड़ने को भी तैयार हो जाता है। (हम दिल दे चुके सनमयाद रही है...?) इस कहानी को बनाया है अनुराग कश्यप ने जो इससे पहले भी देव डीमें एक प्रेम-त्रिकोण दिखा चुके हैं। तो जनाब, कुल मिला कर मामला यह कि कहानी है हम दिल दे चुके सनमवाली, सैटअप है तनु वैड्स मनुवाला और ट्रीटमैंट है देव डीवाला। कुछ इस तरह से की हैं अनुराग ने मनमर्ज़ियां। अब की हैं, तो की हैं।