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Friday, 17 March 2017

रिव्यू-अलग है, उम्दा है ‘ट्रैप्ड’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सोचिए, मुंबई की एक 40 मंजिला खाली इमारत की 35वीं मंजिल के एक फ्लैट में एक युवक अकेला फंस जाए। उसके पास बात करने को मोबाइल हो, लिखने के लिए पेन। बिजली, पानी। कुछ खाने को हो, पीने को। कोई औजार, हथियार। उसे तलाशने वाला कोई दोस्त, कोई यार। उसकी कोई सुनता हो, किसी को उसकी परवाह हो। बताइए, कैसे वह यहां से निकलेगा?