-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
एक बैंक में चोरी करने तीन चोर पहुंचे हैं। तीनों दिमाग से पैदल हैं और बेहद बेवकूफाना हरकतें करते हैं। लेकिन इससे पहले कि वे कुछ कर पाएं, वहां पुलिस और सी.बी.आई. वाले भी पहुंच जाते हैं। अब खुलने शुरू होते हैं कुछ राज़ और कहानी में आने लगते हैं नए-नए ट्विस्ट।
एक काॅमेडी फिल्म के तौर पर शुरू होकर बहुत जल्द थ्रिलर बन जाने वाली इस फिल्म से मुझे सचमुच बहुत उम्मीदें थीं। लग रहा था कि काफी दिनों से सूखे पड़े बाजार और नीरस मन को यह फिल्म तर कर देगी। लेकिन अफसोस, कि ऐसा नहीं हो पाया। फिल्म में काॅमेडी है लेकिन वह आप को ठहाके नहीं लगवा पाती। थ्रिल है लेकिन वह आपको चौंकाता कम और उलझाता ज्यादा है। वैसे भी इस किस्म की कहानी में वह नहीं होता जो आप देखना चाहते हैं, बल्कि वह होता है जो लेखक-निर्देशक आपको दिखाना चाहते हैं।
