नेत्रा पाटिल को जाना है स्विट्जरलैंड लेकिन उसकी किस्मत में लिखी है एक सरकारी दफ्तर की क्लर्की। ए.सी.पी. सौम्या शुक्ला खुद को समझती है जेम्स बॉण्ड लेकिन डिपार्टमैंट ने उसे बना रखा है आइटम गर्ल। दोनों के सपने जुदा, दुनिया जुदा, ज़िंदगी जुदा, ज़िंदगी जीने का ढंग जुदा। एक जगह ये दोनों मिलती हैं और फिर साथ चलने लगती हैं। दरअसल नेत्रा मरने वाली है। उसके पास सिर्फ हंड्रेड डेज़ (सौ दिन) हैं। इस दौरान वह वो सब कुछ कर लेना चाहती है,
जो उसने अभी तक नहीं किया। उसे अपनी बची हुई ज़िंदगी में एक्साइटमैंट चाहिए और यह एक्साइटमैंट उसे देती है ‘सौम्या मईडम’ अपनी मुखबिर बना कर।
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Saturday, 4 July 2020
वेब-रिव्यू : अच्छा, टाइम-पास एंटरटेनमैंट देती ‘हंड्रेड’
नेत्रा पाटिल को जाना है स्विट्जरलैंड लेकिन उसकी किस्मत में लिखी है एक सरकारी दफ्तर की क्लर्की। ए.सी.पी. सौम्या शुक्ला खुद को समझती है जेम्स बॉण्ड लेकिन डिपार्टमैंट ने उसे बना रखा है आइटम गर्ल। दोनों के सपने जुदा, दुनिया जुदा, ज़िंदगी जुदा, ज़िंदगी जीने का ढंग जुदा। एक जगह ये दोनों मिलती हैं और फिर साथ चलने लगती हैं। दरअसल नेत्रा मरने वाली है। उसके पास सिर्फ हंड्रेड डेज़ (सौ दिन) हैं। इस दौरान वह वो सब कुछ कर लेना चाहती है,
जो उसने अभी तक नहीं किया। उसे अपनी बची हुई ज़िंदगी में एक्साइटमैंट चाहिए और यह एक्साइटमैंट उसे देती है ‘सौम्या मईडम’ अपनी मुखबिर बना कर।
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