भरतनाट्यम-भारत का डांस। हमारा ‘अपना’ डांस। लेकिन अगर कोई ‘पराया’ भी इसे करना चाहे तो हम उसे रोकते नहीं हैं। ऐसी ही एक ‘पराई’ लड़की मरियम और उसके पिता के संघर्षों की कहानी है यह। मां की असमय मौत के बाद किशोरी मरियम का मन हुआ कि वह भरतनाट्यम सीखे। पिता सलीम ने रोका नहीं, उलटे साथ दिया। लेकिन आड़े आ गए तंग सोच वाले वे लोग जिन्होंने समाज की हर बात का ठेका ले रखा है। हाशिम सेठ के इशारे पर सलीम को उसके ‘अपनों’ ने ही दुत्कारना शुरू कर दिया। उधर जयप्रकाश जैसे लोग भी भला कहां खुश थे एक ‘पराई’ लड़की को यह डांस करते देख कर।
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Saturday, 22 August 2020
रिव्यू-तंग सोच को ठेंगा दिखाती ‘मी रक़्सम’
भरतनाट्यम-भारत का डांस। हमारा ‘अपना’ डांस। लेकिन अगर कोई ‘पराया’ भी इसे करना चाहे तो हम उसे रोकते नहीं हैं। ऐसी ही एक ‘पराई’ लड़की मरियम और उसके पिता के संघर्षों की कहानी है यह। मां की असमय मौत के बाद किशोरी मरियम का मन हुआ कि वह भरतनाट्यम सीखे। पिता सलीम ने रोका नहीं, उलटे साथ दिया। लेकिन आड़े आ गए तंग सोच वाले वे लोग जिन्होंने समाज की हर बात का ठेका ले रखा है। हाशिम सेठ के इशारे पर सलीम को उसके ‘अपनों’ ने ही दुत्कारना शुरू कर दिया। उधर जयप्रकाश जैसे लोग भी भला कहां खुश थे एक ‘पराई’ लड़की को यह डांस करते देख कर।
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