-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
‘‘शहर बनारस के दक्खिनी छोर पर गंगा किनारे बसा ऐतिहासिक मुहल्ला अस्सी। अस्सी चौराहे पर भीड़-भाड़ वाली चाय की एक दुकान। इस दुकान में रात-दिन बहसों में उलझते, लड़ते-झगड़ते गाली-गलौज करते कुछ स्वनामधन्य अखाड़िए बैठकबाज। इसी मुहल्ले और दुकान का लाइव शो है यह कृति।’’
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Friday, 16 November 2018
रिव्यू-बाज़ार में तब्दील होते समाज का किस्सा-‘मोहल्ला अस्सी’
Sunday, 4 November 2018
काशी को मान दिलाएगी ‘मौहल्ला अस्सी’-कहते हैं निर्माता विनय तिवारी
-दीपक दुआ...
विनय तिवारी से मेरी पहली और अब तक की इकलौती मुलाकात तब हुई थी जब कुछ बरस पहले मुझे यू.पी. के बुलंदशहर में किसी नहर के किनारे टी.वी. पत्रकार से फिल्मकार बने विनोद कापड़ी की फिल्म ‘मिस टनकपुर हाज़िर हो’ की शूटिंग कवर करने के लिए बुलाया गया था। वहीं पता चला कि इस फिल्म के निर्माता विनय तिवारी की यह दूसरी फिल्म है और पहली वाली ‘मौहल्ला अस्सी’
अटकी पड़ी है। लेकिन उनका कहना था कि यह फिल्म भी बहुत जल्द आ जाएगी। लेकिन ऐसा न हो सका। लड़ाई-झगड़े,
कोर्ट-कचहरी जैसे टंटे बीच में आ गए। इस दौरान यह फिल्म किसी ने इंटरनेट पर लीक भी कर दी। इस बीच कई बार इस फिल्म के आने की सुगबुगाहट हुई लेकिन यह आ नहीं पाई। अब इस 16 नवंबर को यह रिलीज़ होने जा रही है। इस फिल्म और उनके सफर पर मैंने विनय तिवारी से बातचीत की। आप भी पढ़िए-
-दोनों ही चीजें हो रही हैं। इतने साल पहले जो सपना देखा था, जहां से सफर शुरू किया था,
वह मंजिल अब आने वाली है तो अच्छा भी लग रहा है और दिल में धुकधुकी भी है। हालांकि इतना यकीन है कि जो चीज हम लोगों ने बनाई है, वह बहुत अच्छी है और जो लोग सिनेमा में कुछ बढ़िया देखने के शौकीन हैं,
उन्हें यह जरूर पसंद भी आएगी।
Wednesday, 24 August 2016
इंटरव्यू-साक्षी तंवर-मम्मी जैसा नहीं पापा जैसा रोल
पार्वती भाभी का रूप बदल चुका है। ‘कहानी घर घर की’, ‘कुटुंब’, ‘बालिका वधू’, ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ जैसे कई शोज में आने के अलावा साक्षी ने सनी देओल के साथ एक फिल्म ‘मौहल्ला अस्सी’ भी की जो अभी तक रिलीज नहीं हो पाई है। अब वह टी.वी. शो ‘24 सीजन 2’ में दिख रही हैं। पिछले दिनों दिल्ली आने पर उनसे यह बातचीत हुई-
-आपने अब तक बहन, बहू, बेटी के ही रोल निभाए हैं। इस किरदार को करने का अनुभव कितना अलग रहा?
-यह सही है कि मेरे अब तक के कैरियर में मैंने इस तरह का रोल नहीं किया है। और क्योंकि यह इतना अलग है इसीलिए मैंने इसे सुनते ही हां कह दिया था। हालांकि पहले तो मैं हैरान हुई थी कि कैसे उन्होंने मुझे एक ऐसा रोल आॅफर किया जिसमें मैं खुद ही अपने-आप को नहीं देख पा रही हूं। कई बार मुझे भी लगा कि मैं इसे कर भी पाऊंगी या नहीं लेकिन मैंने कोशिश की और मुझे लगता है कि मैं सफल भी हुई हूं। मजा बहुत आया इसे करने में क्योंकि जब कुछ अलग करने को मिलता है तो आप भी अपने अंदर की रचनात्मकता को जोर लगा कर बाहर निकालते हैं और चाहते हैं कि लोग आपको इस नए रूप में भी स्वीकारें।
-क्या कुछ तैयारी करनी पड़ी इसके लिए?
-पहली तैयारी तो खुद को इस तरह के किरदार में सोचने की करनी पड़ी। इसमें कहीं भी इमोशंस या हल्केपन की गुंजाइश नहीं थी। कैमरे के सामने मुझे हमेशा एंटी टेररिस्ट यूनिट की हैड की तरह बर्ताव करना था। मैंने इस रोल के लिए अपने पापा से भी काफी टिप्स लिए क्योंकि वह आर्मी से रिटायर हुए हैं। मैं कहना चाहूंगी कि मैंने अपनी मम्मी जैसे रोल तो काफी किए लेकिन पापा जैसा रोल पहली बार कर रही हूं।
-अनिल कपूर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
-‘मौहल्ला अस्सी’ के अभी तक न रिलीज हो पाने का कितना अफसोस है?
-एक कलाकार को तो यही लगता है कि उसने इतनी मेहनत की है तो वह लोगों तक पहुंचे, बाकी तो भगवान के हाथ में है।
-‘24’ के अलावा और क्या कर रही हैं, कोई फिल्म या शो?
-अभी तो मेरे पास सिर्फ यही है। इसके बाद ही किसी और चीज के बारे में सोचूंगी और तभी उस पर बात करूंगी।
-दीपक दुआ
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