करीब दस बरस पहले चार-पांच साल के बुधिया ने ओड़िशा में ढेरों मैराथन दौड़ कर दुनिया भर में नाम कमाया था। बेहद गरीब घर के इस बच्चे को एक अतिमहत्वाकांक्षी कोच बिरंची दास दुनिया के सामने लाया था लेकिन कैसे उसके इरादे,
बुधिया के सपने और लोगों की उम्मीदें राजनीति का शिकार होकर गर्क हो गई थीं यह तब पता चलता है कि वही बुधिया आज एक असाधारण प्रतिभाशाली लड़के से एक आम किशोर में तब्दील हो चुका है। हालांकि वह अभी भी दौड़ना चाहता है लेकिन कोई उसे मदद नहीं कर रहा है।
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Friday, 5 August 2016
फिल्म समीक्षा-‘बुधिया सिंह’ में है कुछ बात
करीब दस बरस पहले चार-पांच साल के बुधिया ने ओड़िशा में ढेरों मैराथन दौड़ कर दुनिया भर में नाम कमाया था। बेहद गरीब घर के इस बच्चे को एक अतिमहत्वाकांक्षी कोच बिरंची दास दुनिया के सामने लाया था लेकिन कैसे उसके इरादे,
बुधिया के सपने और लोगों की उम्मीदें राजनीति का शिकार होकर गर्क हो गई थीं यह तब पता चलता है कि वही बुधिया आज एक असाधारण प्रतिभाशाली लड़के से एक आम किशोर में तब्दील हो चुका है। हालांकि वह अभी भी दौड़ना चाहता है लेकिन कोई उसे मदद नहीं कर रहा है।
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