Showing posts with label Gopal K. Singh. Show all posts
Showing posts with label Gopal K. Singh. Show all posts

Saturday, 6 October 2018

रिव्यू-रहस्य और रोमांच में लिपटी संगीतमय ‘अंधाधुन’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
फ्रैंच शॉर्ट-फिल्म  पियानो ट्यूनर' में ए अंधा पियानो वादक बताता है कि शाहजहां ने ताजमहल का नक्शा बनाने वाले वास्तुकार की पत्नी को मरवा दिया था कि ताकि वह अपनी पत्नी की जुदाई के दर्द को महसूस कर सके और शाहजहां की पत्नी का एक भव्य मकबरा बना सके।

कलाकार ऐसे ही होते हैं-जुनूनी, अपनी धुन के पक्के, अपनी कला के लिए अंधे और तभी वे ऊंचाइयां छू पाते हैं। इस फिल्म का नायक आकाश भी ऐसा ही एक अंधाऔर अपनी धुनका पक्का पियानो प्लेयर है (वरना हिन्दी में अंधाधुनकोई शब्द नहीं होता) उसकी ज़िंदगी सही जा रही है। पियानो बजाता है, सिखाता है, संयोग से एक गर्लफ्रैंड भी मिल जाती है। लेकिन एक दिन वह एक खून होते हुए देखलेता है। अब अंधा आदमी देखकैसे सकता है? और यहीं से शुरू होती है छल, कपट और धोखे की एक अंधी दौड़ जिसमें कोई भी पाक-साफ नहीं है। हर किसी के अपने छुपे हुए इरादे हैं, स्वार्थ हैं। दूसरों को मात देकर खुद की जीत पक्की करने के इस शतरंजी खेल में ढेरों ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं और यही घुमावदार मोड़ फिल्म के दौरान सिर्फ आपको लगातार बांधे रखते हैं बल्कि एक पल के लिए भी आपको अपनी नज़रें इधर-उधर नहीं करने देते।

Friday, 5 August 2016

फिल्म समीक्षा-‘बुधिया सिंह’ में है कुछ बात

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
करीब दस बरस पहले चार-पांच साल के बुधिया ने ओड़िशा में ढेरों मैराथन दौड़ कर दुनिया भर में नाम कमाया था। बेहद गरीब घर के इस बच्चे को एक अतिमहत्वाकांक्षी कोच बिरंची दास दुनिया के सामने लाया था लेकिन कैसे उसके इरादे, बुधिया के सपने और लोगों की उम्मीदें राजनीति का शिकार होकर गर्क हो गई थीं यह तब पता चलता है कि वही बुधिया आज एक असाधारण प्रतिभाशाली लड़के से एक आम किशोर में तब्दील हो चुका है। हालांकि वह अभी भी दौड़ना चाहता है लेकिन कोई उसे मदद नहीं कर रहा है।

Tuesday, 2 August 2016

‘बुधिया सिंह’ में दिखेंगे गोपाल...



थिएटर और फिल्मों के जाने-पहचाने चेहरे हैं गोपाल सिंह। कंपनी’, ‘ट्रैफिक सिग्नल’, ‘हेट स्टोरी’, ‘एक हसीना थी जैसी कई फिल्मों में आ चुके गोपाल पिछले दिनों बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाममें आए और अब वह मैराथन ब्वाॅय बुधिया पर बनी फिल्म बुधिया सिंह-बोर्न टू रन में आ रहे हैं जो 5 अगस्त, 2016 को रिलीज हो रही है। आज सुबह ही गोपाल से फोन पर ये फटाफट बातें हुईंः-

-इस फिल्म का नाम तो पहले दूरंतो था न?

-हां, लेकिन वायकाॅम 18 ने जब यह फिल्म खरीदी तो उन्हें लगा कि बुधिया सिंहनाम इस के लिए ज्यादा मुफीद रहेगा क्योंकि लोग बुधिया को नाम से जानते हैं और सिर्फ नाम से ही यह समझ में आ जाएगा कि यह फिल्म किस बारे में है।

-वायकाॅम जैसी कंपनियों का इस तरह की छोटे बजट की फिल्मों से जुड़ना कितना फायदेमंद रहता है?

-बहुत ज्यादा। इससे हर किसी को फायदा होता है। फिल्म का उचित प्रचार होता है, ठीक से इनकी मार्केटिंग हो जाती है और ऐसी जगहों तक भी फिल्में पहुंच पाती हैं जहां एक छोटा प्रोड्यूसर अपने दम पर इन्हें नहीं पहुंचा पाता है। हम जैसे कलाकारों को भी संतुष्टि होती है कि जो काम किया वह लोगों तक पहुंच पाया वरना कई बार तो इस तरह की फिल्में न तो ठीक तरह से रिलीज हो पाती हैं और न ही देखी जाती हैं।

-बुधिया सिंह तो बुधिया और उसके कोच की कहानी है। आप इसमें क्या कर रहे हैं?

-इस फिल्म में मैं उस आदमी का किरदार निभा रहा हूं जो बुधिया का सौतेला पिता है जिसके साथ उसकी मां रहती है। उसकी और बुधिया के कोच बिरंची की, जिसका रोल मनोज वाजपेयी ने किया है, आपस में हमेशा तनातनी लगी रहती है। मैं यह नहीं कहता कि बहुत बड़ा रोल है, लेकिन काफी अहम रोल है और मुझे इसे करके काफी मजा आया।

-आगे क्या कर रहे हैं?

-एक काॅमेडी फिल्म ‘3 देव का मुझे काफी बेसब्री से इंतजार है जिसमें के.केे, करण सिंह ग्रोवर, जो बिपाशा बसु के पति हैं, आदि हैं। यह एक जबर्दस्त फिल्म होगी और मुझे उम्मीद है कि इसकी काफी चर्चा होगी। इसके अलावा मैं इन दिनों एक खास चीज यह कर रहा हूं कि अभिनेत्री नंदिता दास कुछ पुराने नाटकों को फिल्मों में तब्दील कर रही हैं। उनके साथ अभी एक फिल्म में काम किया है और आगे भी कुछ करने जा रहा हूं।

-दीपक दुआ