Showing posts with label Manoj Bajpai. Show all posts
Showing posts with label Manoj Bajpai. Show all posts

Saturday, 26 June 2021

रिव्यू-अच्छी ‘रे’ सच्ची ‘रे’ पक्की ‘रे’ कच्ची ‘रे’

-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
.टी.टी. पर इधर एक अच्छी चीज़ उभर कर आई है जिसका नाम है-एंथोलॉजी। यानी लगभग एक ही जैसे विषय पर कही गईं अलग-अलग कहानियों को एक जगह दिखाना। खासतौर से नेटफ्लिक्स पर ऐसी कहानियां काफी रही हैं। इधर आईरेभी एक एंथोलॉजी है जिसमें महान फिल्मकार सत्यजित रे की लिखी चार कहानियों पर बनी चार फिल्में हैं। रे सिर्फ फिल्मकार ही नहीं, लेखक, गीतकार, संगीतकार, चित्रकार, पत्रकार और भी जाने क्या-क्या थे। इन चारों कहानियों की खासियत यह है कि इनके केंद्र में मुख्यतः पुरुष पात्र हैं जिनकी सोच, मनोदशा, आदतों, बातों आदि के ज़रिए ये कहानियां कुछ कहती हैं। क्या कहती हैं, आइए देखें।
 

Thursday, 10 June 2021

वेब रिव्यू-रोमांच की आंच में तप कर निकला ‘फैमिली मैन 2’

एक्शन और रोमांच से भरी एक ऐसी वेब-सीरिज़ जिसका मुख्य नायक एक सीक्रेट एजेंट हो और देश को बचाने के लिए जान हथेली पर लिए घूमता हो, उस सीरिज़ का नामफैमिली मैन’...? किसने सोचा होगा यह नाम? और क्यों? लेकिन इस सीरिज़ को देख चुके लोग जानते हैं कि श्रीकांत तिवारी नाम का यह नायक असल में कितना मजबूर फैमिली-मैन है जो एक तरफ अपने फर्ज़ और दूसरी तरफ अपनी फैमिली के प्रति ज़िम्मेदारियों के बीच इस कदर फंसा हुआ है कि उस पर तरस आता है। उसकी पत्नी उससे खुश नहीं है, बेटी हाथ से निकली जा रही है, लेकिन वह है कि देश और ड्यूटी के प्रति अपने जुनून में कमी नहीं आने देता। यह सीरिज़ दरअसल ऐसे ही जुनूनियों की कहानी है जो सामने आकर हर दिन, हर पल देश के लिए कहीं खड़े हैं, किसी किसी रूप में। एक जगह एजेंट जे.के. कहता भी है-‘करते नेता हैं और मरते हम हैं।तो श्रीकांत का जवाब होता है-‘हम किसी नेता के लिए नहीं, उसके पद और उस पद की प्रतिष्ठा के लिए अपनी जान दांव पर लगाते हैं।