-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बाप-बेटे में बनती नहीं। बेटा शहर में जानवरों का डॉक्टर है। बाप को जंगल और हाथियों
से प्यार है। मां की बरसी पर बेटा आता है। उसी दौरान शिकारी हाथी-दांत के लिए हाथियों
को और उन्हें बचाने आए बाप को भी मार डालते हैं। अब बेटे का फर्ज़ बनता है कि वह एक-एक
को चुन-चुन कर मारे।
बाप-बेटे में बनती नहीं। बेटा शहर में जानवरों का डॉक्टर है। बाप को जंगल और हाथियों
से प्यार है। मां की बरसी पर बेटा आता है। उसी दौरान शिकारी हाथी-दांत के लिए हाथियों
को और उन्हें बचाने आए बाप को भी मार डालते हैं। अब बेटे का फर्ज़ बनता है कि वह एक-एक
को चुन-चुन कर मारे।
