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Friday, 29 March 2019

रिव्यू-बच्चों के मतलब की फिल्म ‘जंगली’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बाप-बेटे में बनती नहीं। बेटा शहर में जानवरों का डॉक्टर है। बाप को जंगल और हाथियों से प्यार है। मां की बरसी पर बेटा आता है। उसी दौरान शिकारी हाथी-दांत के लिए हाथियों को और उन्हें बचाने आए बाप को भी मार डालते हैं। अब बेटे का फर्ज़ बनता है कि वह एक-एक को चुन-चुन कर मारे।

Thursday, 17 January 2019

रिव्यू-‘बॉम्बेरिया’... बेवकूफेरिया... बर्बादेरिया...

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इस रिव्यू की ऊल-जलूल हैडिंग पढ़ कर आप अगर सोच रहे हैं कि यह क्या बला है, तो बता दें कि यह फिल्म यानी बॉम्बेरियाभी ऐसी ही है-ऊल-जलूल, बिना सिर-पैर की, बेमतलब, बेमायने, बेवकूफाना, बर्बादाना...!