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Wednesday, 16 June 2021

रिव्यू-हिम्मत, लगन और जुनून की कहानी है ‘साइना’

 -गति उपाध्याय... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
किसी खिलाड़ी के नाम में अगर कई फर्स्ट जुड़े हों और वो खिलाड़ी महिला भी हो तो उस पर बायोपिक बनाना सिनेमा की ही नहीं, देश की भी ज़रूरत होती है। भारत में सबसे ज़्यादा आउटडोर खेला जाने वाला इनडोर गेम है बैडमिंटन। इससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि एक अरब होने के पहले तक देश में इस लोकप्रिय खेल में सिर्फ एक सितारा था-प्रकाश पादुकोण, बाद में पुलेला गोपीचंद, बस। अमोल गुप्ते की यह फिल्म इसलिए भी ज़रूरी थी कि हाथ में शटल उठा चुके तमाम युवा और बच्चे यह जान सकें कि-
 शहज़ोर अपने ज़ोर में गिरता है मिस्ल बर्क,
 वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले
 

Saturday, 27 March 2021

रिव्यू-‘मुंबई सागा’ वास्तव में है क्या...?

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक शरीफ आदमी ने मजबूरी में एक गुंडे को मारा। गुंडे का बॉस उस शरीफ आदमी के पीछे पड़ गया। बॉस के विरोधी गुट वाले नेता ने उस शरीफ आदमी को अपनी छत्रछाया में ले लिया। शरीफ आदमी अब गुंडा बन गया, अपना गैंग बना लिया। पर जब उसके आका को उससे खतरा महसूस हुआ तो उसने उसे हटाने के लिए दूसरे लोग आगे कर दिए।

Saturday, 26 August 2017

रिव्यू-सिर्फ सूंघने भर के लिए है ‘स्निफ’

-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
बच्चों की किसी फिल्म के साथ अमोल गुप्ते का नाम जुड़ा हो तो लगता है कि कुछ हट के और उम्दा देखने को मिलेगा। ताउम्र बच्चों के लिए ही काम करते रहे अमोल की तारे जमीन परसे लेकर स्टेनली का डब्बाऔर हवा हवाईजैसी फिल्मों में बाल-मनोविज्ञान और बालसुलभ बातें थीं। कोशिश इस बार भी उनकी नेक रही है लेकिन इस कोशिश को कारगुजारी में बदलते समय अमोल इस बार रपट गए हैं, बुरी तरह से।