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Saturday, 27 March 2021

रिव्यू-‘मुंबई सागा’ वास्तव में है क्या...?

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक शरीफ आदमी ने मजबूरी में एक गुंडे को मारा। गुंडे का बॉस उस शरीफ आदमी के पीछे पड़ गया। बॉस के विरोधी गुट वाले नेता ने उस शरीफ आदमी को अपनी छत्रछाया में ले लिया। शरीफ आदमी अब गुंडा बन गया, अपना गैंग बना लिया। पर जब उसके आका को उससे खतरा महसूस हुआ तो उसने उसे हटाने के लिए दूसरे लोग आगे कर दिए।

Tuesday, 21 April 2020

ओल्ड रिव्यू-अनछुए विषय पर स्वस्थ मनोरंजन ‘विकी डोनर’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
किसी संवेदनशील विषय को कैसे उठाया जाता है इसे निर्देशक शुजित सरकार करीब सात साल पहले आई अपनी पिछली और पहली फिल्म यहांमें दिखा चुके हैं। कश्मीर के हालात की पृष्ठभूमि में एक आतंकवादी की बहन और एक फौजी अफसर की प्रेम कहानी दिखाने के बाद अपनी इस फिल्म में शुजित स्पर्म डोनेशन जैसे अनछुए विषय की पृष्ठभूमि में एक पंजाबी लड़के और एक बंगाली लड़की की लव स्टोरी लेकर आए हैं।

Saturday, 17 August 2019

रिव्यू-सच के कई चेहरे हैं ‘बाटला हाउस’ में

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
19 सितंबर, 2008 को दिल्ली के बाटला हाउस’ (या बटला हाउस) की उस इमारत में असल में क्या हुआ था, इसे लेकर तब तरह-तरह की बातें सुनने में आई थीं। आज भले ही इस केस से जुड़ा काफी सारा सच सामने चुका हो फिर भी कुछ लोगों का मानना है कि उस दिन वहां वैसा नहीं हुआ जैसा पुलिस बताती है। वहां कोई आतंकी नहीं थे और पुलिस ने सिर्फ अपनी इज़्ज़त ढांपने के लिए वो फर्ज़ी एनकाउंटर किया था जिसमें कुछ बेकसूर छात्रों के साथ-साथ अपने ही एक इंस्पेक्टर को भी पुलिस वालों ने मार डाला था। यह फिल्म इसी केस से जुड़े पहलुओं, लोगों, उनकी मनोदशाओं और सामने आते सच-झूठ की पड़ताल करती है-कहीं यथार्थवादी तो कहीं फिल्मी तरीके से।

Thursday, 4 April 2019

रिव्यू-‘रोमियो अकबर वॉल्टर’-रॉ है, कच्ची है

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बैंक में काम करने वाले एक शख्स को हमारी खुफिया एजेंसी रॉने परखा, उठाया, सिखाया और जासूस बना कर पाकिस्तान भेज दिया। थोड़े ही वक्त में वो वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआईकी नज़रों में गया। लेकिन उसने भी हार नहीं मानी और बाज़ी ऐसी पलटी कि सब देखते रह गए।

Wednesday, 15 August 2018

रिव्यू-‘सत्यमेव जयते’-असली मसाले सच-सच

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक सीन देखिए। एक करप्ट पुलिस अफसर एक मां से कहता है तू यहां नमाज़ पढ़, अंदर मैं तेरे बेटे को मारता हूं। देखता हूं तेरा अल्लाह उसे कैसे बचाएगा। नमाज़ खत्म होने तक अपना हीरो आकर उस पुलिस वाले को मार देता है।

दूसरा सीन देखिए। एक और करप्ट पुलिस अफसर मोहर्रम के दिन एक मुस्लिम लड़की की इज़्ज़त पर हमला करता है। अपना हीरो आकर उस पुलिस वाले को मोहर्रम के मातम के बीच मार देता है।

आप कहेंगे कि यह फिल्म तो सिर्फ मुस्लिम दर्शकों को खुश करने के लिए बनाई गई है। ऐसा नहीं है जनाब, जब भी अपना हीरो किसी करप्ट पुलिस अफसर को मारता है तो पीछे से शिव तांडव स्तोत्र बजने लगता है। लीजिए, हो गए हिन्दू दर्शक भी खुश...?