-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
‘बागी 2’ का शो शुरू होने से पहले ही मैं थिएटर की कैंटीन से भेलपूरी की प्लेट ले आया था।
बड़ी वाली। बंदे ने बड़े ही उत्साह से एक भगौने में कई तरह की नमकीन,
सेव,
मुरमुरे,
चिप्स,
नमक,
2-3 किस्म के मसाले,
3-4 किस्म की चटनियां डालीं।
उन्हें जबड़-जबड़ हिला-हिला कर मिक्स किया, प्लेट में डाला,
ऊपर से नींबू निचोड़ा और
मूंगफली के दाने और हरे धनिए से सजा कर मुझे थमा दिया। मैं भी कई घंटे का भूखा,
इस सारे मिक्स-मसाले को
फटाफट चट कर गया। मजा भी आया और लगा कि पेट भी भरा है। लेकिन फिल्म खत्म होते-होते
मेरी जुबान पर बस हल्का-सा स्वाद बाकी बचा था और 144 मिनट पहले भरा पेट अब फिर से खाली
लग रहा था।
‘बागी 2’ का शो शुरू होने से पहले ही मैं थिएटर की कैंटीन से भेलपूरी की प्लेट ले आया था।
बड़ी वाली। बंदे ने बड़े ही उत्साह से एक भगौने में कई तरह की नमकीन,
सेव,
मुरमुरे,
चिप्स,
नमक,
2-3 किस्म के मसाले,
3-4 किस्म की चटनियां डालीं।
उन्हें जबड़-जबड़ हिला-हिला कर मिक्स किया, प्लेट में डाला,
ऊपर से नींबू निचोड़ा और
मूंगफली के दाने और हरे धनिए से सजा कर मुझे थमा दिया। मैं भी कई घंटे का भूखा,
इस सारे मिक्स-मसाले को
फटाफट चट कर गया। मजा भी आया और लगा कि पेट भी भरा है। लेकिन फिल्म खत्म होते-होते
मेरी जुबान पर बस हल्का-सा स्वाद बाकी बचा था और 144 मिनट पहले भरा पेट अब फिर से खाली
लग रहा था।