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Tuesday, 20 July 2021

बुक रिव्यू-हॉलीवुड की किसी फिल्म सरीखी ‘पानी की दुनिया’

 -दीपक दुआ...
जल-प्रलय के बाद पृथ्वी पानी में डूब चुकी है। सिर्फ वही जीव बचे हैं जिन्हें पानी में जीवित रहना आता है। लेकिन मछलियों, मगरमच्छों आदि के बीच इंसान का एक बच्चा भी बचा हुआ है। एक ऐसा बच्चा जिसे कुदरत ने पानी के अंदर जीवित रहना सिखा दिया। उसे बचाया भी एक शार्क मछली ने। अब वह अपनी मछली मां और मछली दोस्तों के साथ समंदर के अंदर मखरी नामक नगर में रहता है। लेकिन इस दुनिया में भी छल-कपट, होड़-ईर्ष्या, लालच-द्वेष आदि हैं। बाकी सबसे अलग होने के कारण यह बच्चा ‘मानु’ कइयों को सुहाता भी नहीं है। और फिर एक दिन मखरी पर होता है एक भयंकर हमला।

Sunday, 24 May 2020

बुक रिव्यू-कलम तोड़ ‘बाग़ी बलिया’

-दीपक दुआ...
बलिया-बिहार को छूता उत्तर प्रदेश का आखिरी जिला। भृगु महाराज की धरती। वामन अवतार में आए विष्णु को तीनों लोक दान में दे देने वाले बलि महाराज की धरती। छात्र राजनीति का अखाड़ा। यहीं के एक कॉलेज में पढ़ते दो जिगरी यार-संजय और रफीक। संजय छात्र संघ का अध्यक्ष बनना चाहता है और रफीक उसे अध्यक्ष बनाना। लेकिन यह इतना आसान भी तो नहीं। राजनीति के चालाक खिलाड़ी कुछ ऐसी साज़िशें रचते हैं कि सब उलट-पुलट हो जाता है। इन हालातों से कैसे निबटते हैं ये दोनों, यही कहानी है सत्य व्यास के इस चौथे उपन्यास ‘बाग़ी बलिया’ की।

Monday, 27 April 2020

बुक रिव्यू-आधी हकीकत आधा फसाना सुनाती ‘हज़ारों ख्वाहिशें’


-दीपक दुआ... 
कॉलेज लाइफ की कहानियां, होस्टल लाइफ की कहानियां, दिल्ली शहर की कहानियां, आई.ए.एस. बनने वालों की कहानियां...। हाल के बरसों में नई वाली हिन्दी में इन विषयों पर इतना कुछ आ चुका है कि अब ऐसे किसी विषय पर आए उपन्यास को छूने का भी मन न करे। हिन्द युग्म से आए इस उपन्यास को भी पढ़ना शुरू किया तो लगा कि सत्य व्यास के ‘बनारस टॉकीज़’ और नीलोत्पल मृणाल के ‘डार्क हॉर्स’ को पढ़ने के बाद इसमें नया कुछ नहीं मिलने वाला। लेकिन धीरे-धीरे यह कहानी अपनी एक अलग राह तलाशने लगती है और बहुत जल्द उस राह पर सरपट भी हो जाती है।

Monday, 17 February 2020

पुस्तक समीक्षा-हमारे बीच के नायकों की कहानियां

-दीपक दुआ...
नायक सिर्फ सिनेमा, खेल और राजनीति में ही नहीं होते। हमारे-आपके बीच में भी ऐसे ढेरों लोग मौजूद हैं जिन्होंने किसी न किसी तरह से समाज को बदलने, बेहतर बनाने में महती भूमिका निभाई है, निभा रहे हैं। ऐसे ही 32 लोगों के सफलता पाने की प्रेरणादायक कहानियां हैं इस किताब ‘हीरोज़ एमन्गस्ट अस’  में जिसे लिखा है ‘ब्लॉगर्स एलायंस’ के डॉ. अमित नागपाल ने। इन लोगों में भिक्खु संघसेना हैं जिन्होंने भारतीय सेना छोड़ कर बौद्ध भिक्षु बनने की राह पकड़ी और जब लौट कर लद्दाख गए तो वहां विकास की सुस्त रफ्तार देख कर अपने जन्मक्षेत्र को सुधारने में लग गए।