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Saturday, 8 September 2018

रिव्यू-‘हल्का’-एक हल्की टॉयलेट कथा

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
दिल्ली की एक झोंपड़पट्टी। गरीबी, अशिक्षा, गंदगी, कीचड़। कोई टॉयलेट नहीं। नज़दीक की
रेलवे लाइन पर हल्केहोते सब लोग। टॉयलेट के लिए मिलने वाले सरकारी पैसे से ऐश करते लोग। उस पैसे को देने की एवज में रिश्वत मांगते सरकारी अफसर। स्कूल जाने की बजाय कचरा बीनते बच्चे। इन्हीं बच्चों में से एक पिचकू। सबके सामने हल्काहोने में उसे शर्म आती है। पिता टॉयलेट बनवाने को तैयार नहीं। बच्चा खुद ही यह बीड़ा उठाता है।