-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
एक कहानी में कितनी सच्चाई और कितनी कल्पना होती है?
क्या एक कहानी पूरी तरह से सच हो सकती है? या फिर क्या एक सच असल में कहानी हो सकता है? जितने उलझे हुए ये सवाल हैं लगभग उतने ही उलझे हुए ताने-बाने हैं इस फिल्म की कहानी के। लेकिन जब ये खुलते हैं तो सब सुलझ जाता है। आप इसे देख कर खाली हाथ नहीं लौटते हैं और यही एक कहानी की सफलता है कि जब आप कुछ पढ़ें या देखें तो आपको कुछ हासिल हो।
