राजस्थान की कथा-भूमि बहुत उर्वरक है। लेकिन नामालूम कारणों से हिन्दी सिनेमा यहां उपजी कहानियों के प्रति उदासीन रहा है। यह फिल्म इस सन्नाटे को कम करती है। राजस्थान में बसे चरणसिंह पथिक (जिनकी कहानी पर विशाल भारद्वाज ‘पटाखा’ बना चुके हैं) की कहानी पर राजस्थान के ही फिल्मकार गजेंद्र एस. श्रोत्रिय की बनाई यह फिल्म सिनेमा में गांव, गांव की कहानी और ग्रामीण किरदारों की कमी को दूर करने की छोटी ही सही,
मगर सार्थक कोशिश लगती है। शेमारू मी पर इस फिल्म को सिर्फ 89 रुपए में देखा जा सकता है।
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Sunday, 15 November 2020
रिव्यू-अपने भीतर के ‘कसाई’ से रूबरू करवाती कहानी
Thursday, 30 July 2020
रिव्यू-चौंकाती है ‘माई क्लाईंट्स वाइफ’
छत्तीसगढ़ का रायपुर शहर। हवालात में बंद रघु राम सिंह पर आरोप है कि उसने अपनी बीवी सिंदूरा से मारपीट की। लेकिन उसका कहना है कि सिंदूरा उसे फंसाना चाहती है। उधर सिंदूरा का कहना है कि रघु राम झूठ बोल रहा है। रघु राम का वकील मानस वर्मा कन्फ्यूज़ है कि किसे सच माने। तफ्तीश के दौरान उसे कुछ और संदिग्ध बातें पता चलती हैं। कुछ और संदिग्ध हरकतें होती हैं, कुछ और संदिग्ध लोग सामने आते हैं। और जब अंत में राज़ खुलता है तो...!
Sunday, 26 July 2020
स्पॉट बॉय से ‘माई क्लाईंट्स वाइफ’ तक का सफर
-दीपक दुआ...
क्या आप यकीन करेंगे कि अपनी फिल्म इंडस्ट्री में एक निर्देशक ऐसा भी है जिसकी बनाई तीन शॉर्ट-फिल्मों को तकरीबन 19 करोड़ लोग देख चुके हैं लेकिन इस शख्स की शुरूआत फिल्मों के सैट पर दूसरों को चाय-पानी पिलाने वाले स्पॉट बॉय के तौर पर हुई थी। इस निर्देशक की पहली फीचर फिल्म ‘माई क्लाईंट्स वाइफ’ 31 जुलाई, 2020 को आ रही है। इनका नाम है प्रभाकर ‘मीना भास्कर’ पंत। आप पूछेंगे कि यह कैसा नाम?
तो इसका जवाब यह है कि प्रभाकर पंत नाम के इन निर्देशक महोदय ने अपने नाम में अपने माता-पिता का नाम भी शामिल कर रखा है।
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