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Saturday, 15 September 2018

रिव्यू-सरस छे पर हल्की छे ‘मित्रों’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अहमदाबाद में एक निठल्ला लड़का। है तो इंजीनियर लेकिन शेफ बनना चाहता है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो एक अमीर आदमी का घरजंवाई बन जाए ताकि उनकी मुसीबत टले। इसी शहर की एक होशियार लड़की। बिजनेस करना चाहती है, पढ़ने के लिए बाहर जाना चाहती है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो शादी करे और यहां से टले। उधर वो अमीर आदमी चाहता है कि उसका होने वाला (निठल्ला) दामाद पहले खुद को होशियार साबित करे। सो, यह निठल्ला लड़का और वो होशियार लड़की मिल कर एक बिज़नेस शुरू करते हैं जो चल निकलता है। अब लड़का-लड़की साथ होंगे तो ज़ाहिर है, प्यार-व्यार तो होगा ही। अंत में सारे पप्पा लोग भी मान ही जाते हैं।