जब बात भूत-प्रेत और काले जादू की हो तो मौजूदा दौर में राम गोपाल वर्मा और विक्रम भट्ट ही हैं जो इस मसाले की दुकानें खोले बैठे हैं। भट्ट कैंप की ‘राज’ सीरिज़ की इस तीसरी फिल्म की खासियत यह है कि इसे पहले पार्ट की तरह विक्रम भट्ट ने ही निर्देशित किया है और इस बार उन्होंने समझदारी यह दिखाई है कि एक भावना प्रधान प्रेम-कहानी के इर्द-गिर्द भूत-प्रेत और काले जादू का आडंबर रचा है। यही वजह है कि इधर आई विक्रम की अपनी ही भूतिया फिल्मों से भी यह फिल्म इक्कीस बैठती है।
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Sunday, 5 September 2021
Sunday, 30 August 2020
रिव्यू-सिनेमा की अर्थी उठाती ‘सड़क 2’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अच्छा बताइए कि आपको मुंबई से कैलाश जाना हो तो आप क्या करेंगे? अब यह मत कहिएगा कि कैलाश
तो चीन में है,
पासपोर्ट-वीज़ा लगेगा। आप यह बताइए कि जाएंगे कैसे? कम से कम दिल्ली तक तो
हवाई जहाज पकड़ेंगे न?
लेकिन नहीं हमारी हीरोइन ने मुंबई से ही कार बुक कराई है। वो भी तीन महीने पहले, ठीक उस दिन के लिए जिस
दिन के बारे में उसे पता है कि मर्डर के आरोप में जेल में बंद उसका प्रेमी बाहर आ जाएगा।
तीन महीने में...! सच्ची...! ऊपर से ये दोनों अपने साथ इतने छोटे बैग लेकर जा रहे हैं
जिनमें चार कच्छे-बनियान भी ढंग से न आएं। इससे बड़ा बैग तो दिल्ली की लड़कियां मैट्रो
ट्रेन में लेकर घूमती हैं। हां, जेल से बाहर आते समय उस उल्लू, ओह सॉरी, उस प्रेमी के हाथ में एक
गिटार और एक उल्लू का पिंजरा ज़रूर है। इस लड़की को कोई मारना चाहता है। पर जब तक अपना
टैक्सी-ड्राईवर संजू बाबा उसके साथ है, किस की मज़ाल, जो उसे छू भी सके।Saturday, 15 September 2018
रिव्यू-सरस छे पर हल्की छे ‘मित्रों’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अहमदाबाद में एक निठल्ला लड़का। है तो इंजीनियर लेकिन शेफ बनना चाहता है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो एक अमीर आदमी का घरजंवाई बन जाए ताकि उनकी मुसीबत टले। इसी शहर की एक होशियार लड़की। बिजनेस करना चाहती है,
पढ़ने के लिए बाहर जाना चाहती है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो शादी करे और यहां से टले। उधर वो अमीर आदमी चाहता है कि उसका होने वाला (निठल्ला) दामाद पहले खुद को होशियार साबित करे। सो, यह निठल्ला लड़का और वो होशियार लड़की मिल कर एक बिज़नेस शुरू करते हैं जो चल निकलता है। अब लड़का-लड़की साथ होंगे तो ज़ाहिर है,
प्यार-व्यार तो होगा ही। अंत में सारे पप्पा लोग भी मान ही जाते हैं।
अहमदाबाद में एक निठल्ला लड़का। है तो इंजीनियर लेकिन शेफ बनना चाहता है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो एक अमीर आदमी का घरजंवाई बन जाए ताकि उनकी मुसीबत टले। इसी शहर की एक होशियार लड़की। बिजनेस करना चाहती है,
पढ़ने के लिए बाहर जाना चाहती है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो शादी करे और यहां से टले। उधर वो अमीर आदमी चाहता है कि उसका होने वाला (निठल्ला) दामाद पहले खुद को होशियार साबित करे। सो, यह निठल्ला लड़का और वो होशियार लड़की मिल कर एक बिज़नेस शुरू करते हैं जो चल निकलता है। अब लड़का-लड़की साथ होंगे तो ज़ाहिर है,
प्यार-व्यार तो होगा ही। अंत में सारे पप्पा लोग भी मान ही जाते हैं।Sunday, 14 May 2017
मदर्स डे पर कलर्स चैनल की सौगात है यह शो
‘सावित्री देवी कालेज एंड हाॅस्पिटल’ में होगा मेडिकल लाइन का ड्रामा
‘सावित्री देवी कालेज एंड हाॅस्पिटल’-यह नाम है कलर्स चैनल के नए धारावाहिक का जिसे एक मेडिकल ड्रामा बताया जा रहा है। 15 मई से हर सोमवार से शुक्रवार शाम 5 बजे प्रसारित हो रहे इस शो को बनाया है उन रश्मि शर्मा ने जिनके बनाए कई सीरियल छोटे पर्दे पर आ चुके हैं और जो अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू वाली फिल्म ‘पिंक’ भी बना चुकी हैं। अपने इस नए शो के बारे में वह बताती हैं, ‘यह असल में साची मिश्रा और उसकी मां जया मिश्रा की कहानी है। साची इस मेडिकल काॅलेज में इंटर्न है। उसकी मां का सपना है कि वह डाॅक्टर बने और वह उसी सपने को साकार करने के लिए जुटी हुई है। हम इसे ‘किरदार अनेक-नब्ज एक’ की टैगलाइन के साथ ला रहे हैं क्योंकि यह धारावाहिक कई किरदारों के जीवन की कहानी है जिनकी किस्मत इस अस्पताल से बंधी हुई है।’
इस शो में जया मिश्रा का किरदार अभिनेत्री शिल्पा शिरोडकर निभा रही हैं जो बड़े पर्दे पर लंबे समय तक फिल्मों में आती रहीं। वह बताती हैं, ‘ जया अकेले दम पर अपने बच्चों साची और तपन को पालती है। वह होम-मेड स्नैक्स बनाती है और खुद लोगों के घर डिलीवर करती है। उसकी बेटी साची उसका गौरव है और सावित्री देवी कालेज एंड हाॅस्पिटल में उसे इंटर्नशिप करते देख कर वह खुशी से फूली नहीं समाती। असल में जया का अतीत कुछ हद तक सावित्री देवी कालेज एंड हाॅस्पिटल से जुड़ा है और इसीलिए वह अपनी बेटी को यहां काम करते हुए देखना चाहती है।’
इस शो में साची का रोल कर रही अदाकारा स्वरधा थिगले बताती हैं, ‘साची मेडिकल स्कूल टाॅपर है जिसे विश्वास है कि उस समय भगवान के बाद डाॅक्टर का ही स्थान होता है जब किसी व्यक्ति की जान बचाने की बात होती है। विनम्र मध्यमवर्गीय पारिवारिक पृष्ठभूमि में पली-बढ़ी साची अपनी मां के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।’ स्वरधा का कहना है कि इस शो में शिल्पा शिरोडकर जैसी वरिष्ठ अदाकारा को अपनी मां के किरदार में पाकर वह काफी खुश हैं और उनसे बहुत कुछ सीख भी रही हैं।
-दीपक दुआ...
रश्मि बताती हैं कि यह कहानी दिल्ली स्थित सावित्री देवी काॅलेज एंड हाॅस्पिटल के इर्द-गिर्द घूमती है और इसके सारे किरदार कहीं न कहीं इस काॅलेज से जुड़े हुए हैं। साची यहां पढ़ती है और डाॅ. आनंद मल्होत्रा इस अस्पताल के मालिक हैं। जया और आनंद को एक चीज आपस में जोड़ती है जो आगे चल कर सामने आएगी।
इस शो में साची का रोल कर रही अदाकारा स्वरधा थिगले बताती हैं, ‘साची मेडिकल स्कूल टाॅपर है जिसे विश्वास है कि उस समय भगवान के बाद डाॅक्टर का ही स्थान होता है जब किसी व्यक्ति की जान बचाने की बात होती है। विनम्र मध्यमवर्गीय पारिवारिक पृष्ठभूमि में पली-बढ़ी साची अपनी मां के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।’ स्वरधा का कहना है कि इस शो में शिल्पा शिरोडकर जैसी वरिष्ठ अदाकारा को अपनी मां के किरदार में पाकर वह काफी खुश हैं और उनसे बहुत कुछ सीख भी रही हैं।
वहीं इस धारावाहिक में डाॅ. आनंद मल्होत्रा की भूमिका निभा रहे मोहन कपूर का कहना है, ‘डाॅ. मल्होत्रा एक जाना-माना हार्ट-सर्जन है जिसके ग्राहकों में कई राजनेता और फिल्मी हस्तियां शामिल हैं। उसे अपनी हैसियत के बारे में बेहद गर्व है जिसके लिए उसने अस्पताल बनाया है और वह अपनी आलोचना सुनना पसंद नहीं करता। उसके परिवार के बाकी सदस्य भी मेडिकल लाइन में ही हैं। वह अपनी और अपने अस्पताल की प्रतिष्ठा को बनाए रखने पर पूरा जोर देता है और इसीलिए उसमें थोड़ी अकड़ भी है।’
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