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Wednesday, 17 February 2021

‘बांझ’ के बहाने स्त्री-मन की बातें

-दीपक दुआ...
दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से निकलने के बाद हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री का रुख करने वाली अदाकारा सुष्मिता मुखर्जी ने दसियों फिल्मों और टी.वी. धारावाहिकों में काम किया। पुराने लोग उन्हें टी.वी. धारावाहिककरमचंदमें जासूस करमचंद बने पंकज कपूर की कमअक्ल सेक्रेटरी किटीके तौर पर जानते हैं तो नई पीढ़ी ने उन्हें रोहित शैट्टी कीगोलमालमें अंधी दादी और शाहिद कपूर वालीबत्ती गुल मीटर चालूमें देखा होगा। आजकल वह अभिनय में कम और लेखन सामाजिक कामों में ज्यादा मसरूफ रहती हैं। दो-ढाई साल पहले अपने उपन्यासमी एंड जूही बेबीके बाद अब वह अपना एक कहानी-संग्रहबांझलेकर आई हैं। पिछले दिनों अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी के दिल्ली आने पर मेरा उनसे मिलना हुआ। इस दौरान उन्होंने जो कहा, वह उन्हीं की जुबानी पेश है-

Saturday, 22 September 2018

रिव्यू-मैसेज गुल कॉमेडी चालू

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
उत्तराखंड का टिहरी शहर। तीन गहरे दोस्त। सुंदर (दिव्येंदु शर्मा), सुशील (शाहिर कपूर) और नॉटी (श्रद्धा कपूर) जान छिड़कते हैं एक-दूसरे पर। लेकिन जब नॉटी यानी ललिता नौटियाल अपने लिए सुंदर मोहन त्रिपाठी को चुन लेती है तो सुशील कुमार पंत चिढ़ जाता है और इनसे दूर जाने लगता है। पर जब अपनी फैक्ट्री की बिजली का बिल 54 लाख रुपए आने पर सुंदर खुदकुशी कर लेता है तो वकील सुशील अपने मरहूम दोस्त को न्याय दिलाने के लिए बिजली कंपनी पर केस ठोक देता है।