Showing posts with label shraddha kapoor. Show all posts
Showing posts with label shraddha kapoor. Show all posts

Saturday, 7 March 2020

रिव्यू-क्यों तारीफों के काबिल है ‘बागी 3’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एकदम डिफरेंट किस्म की फिल्म है यह। एक लड़का है, बचपन से ही बागी किस्म का। यहां तक कि अपने बाप को भी नाम से बुलाता है (हालांकि संस्कारी है, पर पता नहीं यह ऐब उसमें कहां से आया) जहां भी उसके भाई पर कोई मुसीबत आती है, यह उसे बचाने पहुंच जाता है। यहां डिफरेंट बात यह है कि यहां पर मुसीबत में बड़ा भाई घिरता है और बचाने का काम छोटा भाई करता है। कहिए, है एकदम ही अलग किस्म की कहानी...? तालियां...!

Friday, 24 January 2020

रिव्यू-मकसद में कामयाब ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि अगर डिज़्नी पिक्चर्स वाले भारत से अपना बिस्तरा उठा कर नहीं भागते तो इस फिल्म का नाम एबीसीडी 3’ होना था। एबीसीडीसीरिज़ की पिछली दो फिल्मों जैसी ही कहानी, वही कलाकार, वही मुकाबले, वही डांस... तो फिर नया क्या है? नया है लंदन शहर, नया है कहानी में आने वाला एक ट्विस्ट। क्या...? आइए, जानते हैं।

Friday, 6 September 2019

रिव्यू-जूझना सिखाते हैं ये ‘छिछोरे’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
ज़िंदगी से हार मानने को तैयार अपने बेटे को हौसला देने के लिए एक बाप उसे अपने कॉलेज और होस्टल के दिनों की कहानी सुना रहा है। धीरे-धीरे इस कहानी के 25-26 साल पुराने किरदार भी जुटते हैं जो उसे बताते हैं कि आज कामयाबी के आसमान पर बैठे ये लोग कभी कितने बड़े लूज़र थे और कैसे इन्होंने मुश्किलों का सामना किया।

Saturday, 31 August 2019

रिव्यू-आप ही के कर्मों का फल है ‘साहो'

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इसी दुनिया के किसी शहर में अंडरवर्ल्ड का बादशाह रॉय रहता है। एक डील के लिए वह मुंबई आता है और मारा जाता है। उसके बेटे को उसके कातिलों की तलाश है। वहीं कुछ लोग उसके बेटे को हटा कर उसकी कुर्सी पर बैठना चाहते हैं। इन सबको तलाश है एक ब्लैक-बॉक्स की जो मुंबई में कहीं है, ताकि उससे एक तिजोरी खोली जा सके। उधर मुंबई में एक चोर ने सबकी नाक में दम कर रखा है जिसे पकड़ने के लिए एक अंडरकवर अफसर को लाया जाता है। लेकिन ऐसी फिल्मों में जो दिखता है, वही सच नहीं होता। और ऐसी फिल्मों में लोग जैसे दिखते हैं, अक्सर वे उसके उलट होते हैं। तो बस, यहां भी एक-एक कर परतें खुलती हैं-कहानी की और लोगों की भी।

Saturday, 22 September 2018

रिव्यू-मैसेज गुल कॉमेडी चालू

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
उत्तराखंड का टिहरी शहर। तीन गहरे दोस्त। सुंदर (दिव्येंदु शर्मा), सुशील (शाहिर कपूर) और नॉटी (श्रद्धा कपूर) जान छिड़कते हैं एक-दूसरे पर। लेकिन जब नॉटी यानी ललिता नौटियाल अपने लिए सुंदर मोहन त्रिपाठी को चुन लेती है तो सुशील कुमार पंत चिढ़ जाता है और इनसे दूर जाने लगता है। पर जब अपनी फैक्ट्री की बिजली का बिल 54 लाख रुपए आने पर सुंदर खुदकुशी कर लेता है तो वकील सुशील अपने मरहूम दोस्त को न्याय दिलाने के लिए बिजली कंपनी पर केस ठोक देता है।

Sunday, 2 September 2018

रिव्यू-सामाजिक सलवटों को इस्त्री करती ‘स्त्री’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
साल में चार दिन उस कस्बे में पूजा होती है। इन्हीं चार दिनों में आती है एक भूतनी। जिस घर के बाहर स्त्री कल आनालिखा होता है, उसमें नहीं जाती। वरना रातों को मर्द उठा कर ले जाती है वह। सिर्फ मर्द, उनके कपड़े नहीं। कहते हैं कि ये भूतनी मर्दों की प्यासी है। जो उसकी आवाज़ पर पलटा, वह गायब। इसी कस्बे के तीन दोस्तों में से एक से पूजा के दिनों में मिलती है एक अनजान लड़की। कोई नाम, नंबर। अचानक आती है, अचानक गायब हो जाती है। कहीं यह लड़की ही वह स्त्रीतो नहीं...?