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Sunday, 3 March 2019

रिव्यू-सेफ गेम है ‘लुका छुपी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
मथुरा के त्रिवेदी जी की बेटी रश्मि को शुक्ला जी के बेटे गुड्डू से शादी करने से पहले लिव-इन में रहना है ताकि वे दोनों एक-दूसरे को अच्छे-से जान-समझ सकें। लेकिन दिक्कत यह है कि त्रिवेदी जी ठहरे संस्कृति रक्षा मंचके मुखिया। प्यार-मोहब्बत करने वाले लौंडे-लौंडियों के मुंह काले करके अपनी संस्कृति को भ्रष्टहोने से बचाने का काम करते हैगे जे लोग। गुड्डू और रश्मि दूसरे शहर में जाकर शादीशुदा होने का नाटक करके साथ रहने लगे। घरवालों को पता चला तो रश्मि की डोली गुड्डू के घर पहुंचा दी गई। लेकिन ये दोनों तो शादीशुदा हैं ही नहीं। तो शुरू हुई इनकी लुका छुपी घर वालों के साथ, समाज के साथ और खुद अपने साथ।

Saturday, 22 September 2018

रिव्यू-मैसेज गुल कॉमेडी चालू

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
उत्तराखंड का टिहरी शहर। तीन गहरे दोस्त। सुंदर (दिव्येंदु शर्मा), सुशील (शाहिर कपूर) और नॉटी (श्रद्धा कपूर) जान छिड़कते हैं एक-दूसरे पर। लेकिन जब नॉटी यानी ललिता नौटियाल अपने लिए सुंदर मोहन त्रिपाठी को चुन लेती है तो सुशील कुमार पंत चिढ़ जाता है और इनसे दूर जाने लगता है। पर जब अपनी फैक्ट्री की बिजली का बिल 54 लाख रुपए आने पर सुंदर खुदकुशी कर लेता है तो वकील सुशील अपने मरहूम दोस्त को न्याय दिलाने के लिए बिजली कंपनी पर केस ठोक देता है।

Sunday, 2 September 2018

रिव्यू-सामाजिक सलवटों को इस्त्री करती ‘स्त्री’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
साल में चार दिन उस कस्बे में पूजा होती है। इन्हीं चार दिनों में आती है एक भूतनी। जिस घर के बाहर स्त्री कल आनालिखा होता है, उसमें नहीं जाती। वरना रातों को मर्द उठा कर ले जाती है वह। सिर्फ मर्द, उनके कपड़े नहीं। कहते हैं कि ये भूतनी मर्दों की प्यासी है। जो उसकी आवाज़ पर पलटा, वह गायब। इसी कस्बे के तीन दोस्तों में से एक से पूजा के दिनों में मिलती है एक अनजान लड़की। कोई नाम, नंबर। अचानक आती है, अचानक गायब हो जाती है। कहीं यह लड़की ही वह स्त्रीतो नहीं...?