एक सीन देखिए। एक करप्ट पुलिस अफसर एक मां से कहता है तू यहां नमाज़ पढ़,
अंदर मैं तेरे बेटे को मारता हूं। देखता हूं तेरा अल्लाह उसे कैसे बचाएगा। नमाज़ खत्म होने तक अपना हीरो आकर उस पुलिस वाले को मार देता है।
दूसरा सीन देखिए। एक और करप्ट पुलिस अफसर मोहर्रम के दिन एक मुस्लिम लड़की की इज़्ज़त पर हमला करता है। अपना हीरो आकर उस पुलिस वाले को मोहर्रम के मातम के बीच मार देता है।
आप कहेंगे कि यह फिल्म तो सिर्फ मुस्लिम दर्शकों को खुश करने के लिए बनाई गई है। ऐसा नहीं है जनाब,
जब भी अपना हीरो किसी करप्ट पुलिस अफसर को मारता है तो पीछे से शिव तांडव स्तोत्र बजने लगता है। लीजिए, हो गए न हिन्दू दर्शक भी खुश...?