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Monday, 11 January 2021

रिव्यू-हल्की स्क्रिप्ट से डूबी ‘कागज़’ की नाव

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुए हैं एक लाल बिहारी। एक दिन उन्हें पता चला कि उनके चाचा ने उनके हिस्से की पुश्तैनी ज़मीन हड़पने के लिए उन्हें कागज़ों में मृतक घोषित करवा दिया है। इसके बाद लाल बिहारी बरसों तक तमाम सरकारी दफ्तरों से लेकर कोर्ट-कचहरी तक चक्कर लगाते रहे कि उन्हें ज़िंदा घोषित किया जाए। कई बड़े लोगों के खिलाफ चुनाव तक में खड़े हुए और यू.पी. की विधान सभा में पर्चे तक उछाले। इस दौरान देश भर से उन जैसे ढेरोंमृतकलोग उनके साथ जुड़े और इन्होंने अपना एकमृतक संघतक बना लिया। बरसों के संघर्ष के बाद लाल बिहारी और कुछ अन्य लोगों कोज़िंदाघोषित कर दिया गया लेकिन आज भी बीसियों जीवित लोग खुद को जीवित साबित करने की जद्दोज़हद में लगे हुए हैं।