-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
चंबल का इलाका। बंदूक के दम पर खुद को धाकड़ मानता एक शख्स। उस धाकड़ के दम पर इलाके में अपनी बादशाहत चलाता एक नेता। जाहिर है हर चीज का वक्त पूरा होता है। एक दिन इनका भी हुआ। कुछ ऐसे लोगों ने बंदूक उठा कर इन्हें जमीन पर गिरा दिया जिन्हें ये लोग कमज़ोर समझा करते थे।
चंबल का इलाका। बंदूक के दम पर खुद को धाकड़ मानता एक शख्स। उस धाकड़ के दम पर इलाके में अपनी बादशाहत चलाता एक नेता। जाहिर है हर चीज का वक्त पूरा होता है। एक दिन इनका भी हुआ। कुछ ऐसे लोगों ने बंदूक उठा कर इन्हें जमीन पर गिरा दिया जिन्हें ये लोग कमज़ोर समझा करते थे।