-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
मथुरा के त्रिवेदी जी की बेटी रश्मि को शुक्ला जी के बेटे गुड्डू से शादी करने से पहले लिव-इन में रहना है ताकि वे दोनों एक-दूसरे को अच्छे-से जान-समझ सकें। लेकिन दिक्कत यह है कि त्रिवेदी जी ठहरे ‘संस्कृति रक्षा मंच’ के मुखिया। प्यार-मोहब्बत करने वाले लौंडे-लौंडियों के मुंह काले करके अपनी संस्कृति को ‘भ्रष्ट’
होने से बचाने का काम करते हैगे जे लोग। गुड्डू और रश्मि दूसरे शहर में जाकर शादीशुदा होने का नाटक करके साथ रहने लगे। घरवालों को पता चला तो रश्मि की डोली गुड्डू के घर पहुंचा दी गई। लेकिन ये दोनों तो शादीशुदा हैं ही नहीं। तो शुरू हुई इनकी लुका छुपी घर वालों के साथ, समाज के साथ और खुद अपने साथ।
