अमेरिका से आया एक जोड़ा राजस्थान की लड़की मिमी को 20 लाख रुपए में सरोगेट मदर बनने पर राज़ी करता है। यानी अब मिमी इस जोड़े के बच्चे को 9 महीने तक अपनी कोख में रखेगी और बच्चा पैदा करके उन्हें सौंप देगी। लेकिन अचानक यह जोड़ा लापता हो जाता है। अब मिमी अपने घरवालों को, समाज को क्या जवाब देगी...? बच्चा हुआ, मिमी उसे पालने लगी। कुछ साल बाद वे गोरे आ धमके और उससे अपना बच्चा मांगने लगे। अब मिमी क्या करेगी...?
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Friday, 30 July 2021
रिव्यू-मंज़िल तक पहुंचाती ‘मिमी’
अमेरिका से आया एक जोड़ा राजस्थान की लड़की मिमी को 20 लाख रुपए में सरोगेट मदर बनने पर राज़ी करता है। यानी अब मिमी इस जोड़े के बच्चे को 9 महीने तक अपनी कोख में रखेगी और बच्चा पैदा करके उन्हें सौंप देगी। लेकिन अचानक यह जोड़ा लापता हो जाता है। अब मिमी अपने घरवालों को, समाज को क्या जवाब देगी...? बच्चा हुआ, मिमी उसे पालने लगी। कुछ साल बाद वे गोरे आ धमके और उससे अपना बच्चा मांगने लगे। अब मिमी क्या करेगी...?
Friday, 6 December 2019
रिव्यू-ज़ंग लगे हथियारों वाली ‘पानीपत’ की जंग
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इतिहास के पन्नों से निकली किसी कहानी को फिल्मी पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता। ‘जोधा अकबर’ में इस काम को साध चुके आशुतोष गोवारीकर ‘खेलें हम जी जान से’ और ‘मोहेंजो दारो’ में नाकामी झेलने के बाद अगर फिर से इतिहास के समंदर में कूदे हैं तो उनके साहस की तारीफ होनी चाहिए। भले ही इस बार भी उनके हाथ में सच्चा मोती न लगा हो लेकिन उन्होंने निराश भी नहीं किया है। सच तो यह है कि इस फिल्म को फिल्म की बजाय इतिहास के किसी अध्याय की तरह देखा जाए तो यह उस दौर के माहौल की तस्वीर उकेर पाने में कामयाब दिखती है।
इतिहास के पन्नों से निकली किसी कहानी को फिल्मी पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता। ‘जोधा अकबर’ में इस काम को साध चुके आशुतोष गोवारीकर ‘खेलें हम जी जान से’ और ‘मोहेंजो दारो’ में नाकामी झेलने के बाद अगर फिर से इतिहास के समंदर में कूदे हैं तो उनके साहस की तारीफ होनी चाहिए। भले ही इस बार भी उनके हाथ में सच्चा मोती न लगा हो लेकिन उन्होंने निराश भी नहीं किया है। सच तो यह है कि इस फिल्म को फिल्म की बजाय इतिहास के किसी अध्याय की तरह देखा जाए तो यह उस दौर के माहौल की तस्वीर उकेर पाने में कामयाब दिखती है।Sunday, 28 July 2019
रिव्यू-अर्जुन ‘लिटल-लिटल’ पटियाला
-दीपक दुआ...(Featured in IMDb Critics Reviews)
इस फिल्म में पांच गाने हैं, हीरो-हीरोइन का रोमांस है, कॉमेडी है, पांच विलेन हैं (जो अंताक्षरी खेलने के लिए तो नहीं रखे गए हैं) यानी एक्शन भी है, इमोशन भी है, सोशल मैसेज भी है, और हां, सनी (पा जी नहीं) लियोनी भी है। अब एक हिन्दी फिल्म में आपको और क्या चाहिए?
इस फिल्म में पांच गाने हैं, हीरो-हीरोइन का रोमांस है, कॉमेडी है, पांच विलेन हैं (जो अंताक्षरी खेलने के लिए तो नहीं रखे गए हैं) यानी एक्शन भी है, इमोशन भी है, सोशल मैसेज भी है, और हां, सनी (पा जी नहीं) लियोनी भी है। अब एक हिन्दी फिल्म में आपको और क्या चाहिए?
Sunday, 3 March 2019
रिव्यू-सेफ गेम है ‘लुका छुपी’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
मथुरा के त्रिवेदी जी की बेटी रश्मि को शुक्ला जी के बेटे गुड्डू से शादी करने से पहले लिव-इन में रहना है ताकि वे दोनों एक-दूसरे को अच्छे-से जान-समझ सकें। लेकिन दिक्कत यह है कि त्रिवेदी जी ठहरे ‘संस्कृति रक्षा मंच’ के मुखिया। प्यार-मोहब्बत करने वाले लौंडे-लौंडियों के मुंह काले करके अपनी संस्कृति को ‘भ्रष्ट’
होने से बचाने का काम करते हैगे जे लोग। गुड्डू और रश्मि दूसरे शहर में जाकर शादीशुदा होने का नाटक करके साथ रहने लगे। घरवालों को पता चला तो रश्मि की डोली गुड्डू के घर पहुंचा दी गई। लेकिन ये दोनों तो शादीशुदा हैं ही नहीं। तो शुरू हुई इनकी लुका छुपी घर वालों के साथ, समाज के साथ और खुद अपने साथ।
Sunday, 20 August 2017
रिव्यू-हल्के मीठे वाली ‘बरेली की बर्फी’
-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
बरेली की बिट्टी मिश्रा आजादख्याल है। सिगरेट, शराब, अंग्रेजी फिल्में, ब्रेक डांस और बागी तेवर उसकी पहचान हैं। एक उपन्यास ‘बरेली की बर्फी’ की नायिका में अपने ही जैसे ‘गुणों’ को पाकर वह उसके लेखक प्रीतम विद्रोही की खोज में लग जाती है। मदद करता है उस उपन्यास का असली लेखक चिराग दुबे। प्रेम-त्रिकोण की तमाम खींचतान के बाद अंत तो मीठा होना ही हुआ। भई, नाम में ही बर्फी जुड़ा है।
बरेली की बिट्टी मिश्रा आजादख्याल है। सिगरेट, शराब, अंग्रेजी फिल्में, ब्रेक डांस और बागी तेवर उसकी पहचान हैं। एक उपन्यास ‘बरेली की बर्फी’ की नायिका में अपने ही जैसे ‘गुणों’ को पाकर वह उसके लेखक प्रीतम विद्रोही की खोज में लग जाती है। मदद करता है उस उपन्यास का असली लेखक चिराग दुबे। प्रेम-त्रिकोण की तमाम खींचतान के बाद अंत तो मीठा होना ही हुआ। भई, नाम में ही बर्फी जुड़ा है।
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